इटावा-बाह-बटेश्वर व भिंड लाइन बनने पर इटावा-मैनपुरी लाइन पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया है। पर, अभी तक यहां यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। आने वाले रेल बजट से शहरवासियों को आस लगी है कि क्या स्टेशन को जंक्शन का दर्जा मिलेगा। इसके साथ तमाम अन्य सुविधाओं के लिए भी बजट मिल पाएगा। शहरवासी इसी उम्मीद के साथ रेल बजट का इंतजार कर रहे हैं।
वर्ष 2015 शहर में रेलवे का स्वर्णिम वर्ष रहा है। इस वर्ष में शहर से जुड़ी रेलवे की तीन बड़ी परियोजनाओं में से दो पूरी हो गईं तो तीसरी परियोजना लगभग पूर्ण होने की कगार पर पहुंच गई है।
यह तीनों परियोजनाएं 13 से 24 साल पुरानी हैं। इनमें सबसे प्रमुख इटावा-बाह-बटेश्वर रेलवे लाइन व इटावा-भिंड लाइन है जो न सिर्फ बनकर पूरी हो गई है बल्कि इस पर ट्रेनों का संचालन भी शुरू हो चुका है।
बाह लाइन पर यात्री ट्रेन भी चलने लगी है तो भिंड लाइन पर भी कुछ ही दिनों में यात्री ट्रेन शुरू होने से इटावा स्टेशन मध्य प्रदेश से जुड़ जाएगा। उधर, इटावा-मैनपुरी लाइन पर भी ट्रायल हो चुका है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस ट्रैक पर भी ट्रेनें दौड़ने लगेंगी।
इसके बाद रेलवे की रीढ़ कहे जाने वाले दिल्ली हावड़ा ट्रैक पर बना इटावा स्टेशन इस प्रमुख ट्रैक को मध्य भारत व उत्तरी क्षेत्र से जोड़ने वाला जंक्शन बन जाएगा और यात्रियों की संख्या में इजाफे के साथ इसका महत्व टूंडला और इलाहाबाद जंक्शन की तरह बढ़ जाएगा। जहां इटावा रेलवे स्टेशन को नई ऊंचाईयां मिली हैं वहीं स्टेशन की सुविधाओं को लेकर अभी भी रेल अधिकारी बेपरवाह हैं।
रेल बजट आने में अब सिर्फ एक हफ्ते बचे हैं। क्या इटावा रेलवे स्टेशन को बजट में जंक्शन का दर्जा दिया जाएगा और विकास के लिए क्या मिलेगा इस पर हर शहरवासी की नजर टिकी हुई है।
शहर की आधी आबादी लाइन पार क्षेत्र में निवास करती है। लाइनपार के लोगों को स्टेशन तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर चक्कर लगाना पड़ता है। तब कहीं जाकर वह अपनी ट्रेन को पकड़ पाते हैं।
कई बार प्लेटफार्म नंबर पांच के उत्तरी छोर पर टिकट विंडो के साथ स्टेशन पर आने जाने के लिए रास्ता बनाने के लिए रेलवे अधिकारी नाप जोख कर चुके हैं लेकिन अभी तक इस कार्य पर रेलवे की मुहर नहीं लग सकी है।
अब शहरवासी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आने वाले बजट में इटावा स्टेशन को जंक्शन का दर्जा मिलने के साथ मूलभूत सुविधाओं के लिए बजट मिलेगा।
रेलवे स्टेशन की दूसरी बड़ी आवश्यकता लाइन पार क्षेत्र में आने-जाने के लिए कोई आरओबी(पुल) नहीं है। जिस कारण लोग मालगोदम से से रेलवे ट्रैक को पार कर जाते हैं। खास बात यह है कि स्वयं रेलवे के सैकड़ों अधिकारी व कर्मचारी भी लाइन पार बनी रेलवे कॉलोनी में रहते हैं ।
वह भी मालगोदाम से होते हुए ट्रैक पर कर जाते हैं। स्थिति तब और बिगड़ जाती है जब इस अवैध रास्ते पर मालगाड़ी खड़ी हो जाती है। ऐसे में लोग खड़ी ट्रेन के नीचे से निकलकर आते-जाते हैं। इस बड़ी समस्या को कई बार रेल अधिकारियों के सामने रखा गया है। स्टेशन के अधिकारियों ने आरओबी के लिए बजट का आभाव बताया है।
रेलवे से जुड़ी शहर की सबसे बड़ी समस्या शहर क ा रामनगर रेलवे क्रॉसिंग है। इस स्थान पर रेलवे ने अंडरपास बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसके लिए रेलवे के इंजीनियरों ने नाप-जोख भी की थी।
बताया गया था कि इस क्रॉसिंग पर रेलवे ऐसे अंडरपास का निर्माण करने की तैयारी कर रहा है। जिसमें हल्के वाहन ही निकल सकें। वहीं भारी वाहनों के लिए बरेली-ग्वालियर मार्ग पर बने गुरु तेग बहादुर उपरगामी पुल से तो हल्के वाहनों के लिए रामनगर क्रॉसिंग से अंडरपास के जरिए गुजराने की योजना को भी बने कई वर्ष बीत गए हैं लेकिन अभी तक इस प्रस्ताव पर भी रेल मंत्रालय की मुहर नहीं लगी है।
यहां सुबह से शाम तक भीषण जाम की समस्या रहती है। आगामी बजट में रेल मंत्री सुरेश प्रभु इस योजना के लिए भी पैसा दे सक ते हैं और शहर को जाम से मुक्ति मिल सकती है।