राजनीतिक नजरिए से प्रदेश के खास जिलों गोरखपुर और इटावा के बीच पुल बनने जा रहे सफारी के शेरों पर सबकी नजर है।
गोरखपुर के निर्माणाधीन चिड़ियाघर के लिए इटावा सफारी से शेरों को भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
माना जा रहा है कि सितंबर तक इटावा सफारी के ये शेर गोरखपुर के चिड़ियाघर में दहाड़े मारेंगे।
इटावा सफारी के निदेशक वीके सिंह का कहना है कि यहां के ब्रीडिंग सेंटर में अभी तक सात शेर पैदा हो चुके हैं।
ये शेर यूपी की आबोहवा में खुद को ढालने की क्षमता वाले हैं। इन शेरों में बीमारियां का खतरा कम होने के साथ उम्र भी ज्यादा होगी।
उनका कहना है कि इस ब्रीडिंग सेेंटर के शेरों को प्रदेश भर में पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल गोरखपुर में बन रहे चिड़ियाघर के लिए तीन शेर भेजने की तैयारी है। उम्मीद है कि सितंबर तक यह शेर गोरखपुर पहुंच जाएंगे।
गुजरात के जूनागढ़ में वर्ष 2014 से 16 के बीच दर्जनों शेरों की घातक बीमारी से मौत के बाद इटावा सफारी में इस पर शोध हुआ।
शोध में पाया गया कि कुत्तों से फैलने वाले कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की वजह से शेर मौत के शिकार हो रहे हैं। इटावा सफारी ने अमेरिका से इसका वैक्सीन मंगवाया जिससे शेरों के मरने का सिलसिला थमा।
अब इटावा सफारी शेरों को इस घातक बीमारी से बचाने वाले प्योरवैक्स फेरेट डिटेंपरी वायल नाम के इस वक्सीन का अर्थराइज सेंटर है।
शेरों का गोरखपुर या किसी भी जिले में भेजा जाना इटावा के लोगों के लिए गर्व की बात है। लेकिन इसके पहले यहां के लायन सफारी को खोला जाना चाहिए जिसका पर्यटक और स्थानीय लोग कई साल से इंतजार कर रहे हैं।
गोपाल यादव, जिलाध्यक्ष सपा
सरकार इटावा लायन सफारी को भी जल्द खोलने का निर्देश दे चुकी है। सरकार इटावा सफारी को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है।
अजय धाकरे, जिलाध्यक्ष बीजेपी