पैरों से कापी पर लिखते अबू हमजा
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इटावा। हौसले बुलंद हो तो जीवन की मुश्किलों पार पाया जा सकता है। यह साबित कर दिखाया है पांच साल पहले हादसे में दोनों हाथ गवां चुके 13 साल के अबू हमजा ने। वे पैरों से लिखना, खुद ही सीने के बल से साइकिल चलाकर स्कूल आते-जाते हैं। बैडमिंटन भी खेलते हैं। कक्षा 7 के छात्र अबू हमजा ने दिव्यांगता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।
अबू हमजा ने बताया उसका सपना पढ़ लिखकर कंप्यूटर इंजीनियर बनने का है। बताया कि स्कूल में उसकी सहायता कक्षा के सभी छात्र करते हैं। सबसे ज्यादा मदद अंकित राजपूत करता हैं। वे बैग उठाने और खाना खिलाने, पानी पिलाने तक का कार्य करते हैं। होम वर्क में भी पूरी मदद करते हैं। साथी ऋषभ भी खाना खिलाते हैं। किसी प्रकार की कोई कमी महसूस नहीं होती। अबू हमजा ने बताया कि उसे हर खेल खेलने का शौक हैं। गेंद खेलने से लेकर घर पर छोटी बहन की मदद से बैडमिंटन और कैरम खेलता है।
घटना के बारे में बताया कि साल 2014 में वह कक्षा दो में पढ़ रहा था। उसी दौरान अपने दादा को देखने के लिए बड़े पापा के घर गया था। उन दिनों बारिश का मौसम था। छत पर खेलते समय लोहे की ग्रिल पर हाथ पड़ गया। इसमें 11 हजार वोल्ट का हाइटेंशन आ रहा था। करंट के बाद बेहोश हो गया। परिवार के लोग पहले आगरा ले गए जहां से तीन दिन बाद जयपुर ले गए। इलाज के दौरान उसके हाथ काटने पडे़।
कटरा शमशेर खां निवासी एवं ट्रांसपोर्टर लईकउद्दीन ने अबू हमजा को कृत्रिम हाथ लगाए जाने के बारे में बताया। इस पर डाक्टरों ने सुझाव दिया था कि अभी बच्चा छोटा है। लंबाई बढ़ेगी ऐसे में कृत्रिम हाथ हर बार बदलवाने पडे़ंगे। इसमें काफी खर्च आएगा। शरीर का विकास रुकने पर कृत्रिम हाथ लगवाना बेहतर होगा।
मां परवीन अबू की दैनिक क्रिया कराने से लेकर खाना खिलाने का कार्य करतीं हैं। अबू का बढ़ा भाई जीशान हाईस्कूल में पढ़ता है। छोटी बहन हयात के साथ घर पर कैरम और बैडमिंटन खेलते हैं। रॉयल ऑक्सफोर्ड स्कूल के प्रबंधक सुरेश यादव ने बताया अबू हमजा कक्षा एक से पढ़ रहा है। कक्षा दो उसके साथ हादसा घटित हो गया। वह अबू हमजा से फीस नहीं लेते हैं।