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भाजपा का प्रत्याशी नहीं आया सामने, अंशुल का जीतना तय

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इटावा। सपा-प्रसपा के संयुक्त प्रत्याशी निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक यादव उर्फ अंशुल की दोबारा जीत लगभग तय हो गई है।
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शुक्रवार को जिला पंचायत के नामांकन पत्र बिक्री का अंतिम दिन था, लेकिन अंशुल को छोड़कर किसी भी दल के प्रत्याशी ने नामांकन पत्र नहीं खरीदा है।
यहां तक सत्ताधारी दल भाजपा का भी कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा है। जबकि, पिछले दिनों इटावा आए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने दावा किया था कि नामांकन के वक्त का इंतजार कीजिए। इटावा ही नहीं प्रदेश में किस दल का जिला पंचायत अध्यक्ष बनेगा, यह सामने आ जाएगा।
जिले में जिला पंचायत सदस्य की 24 सीटें हैं। इनमें 20 सीटों पर सपा-प्रसपा गठबंधन के उम्मीदवारों ने अपनी जीत दर्ज की है। इनमें भी 18 सीटें सपा के खाते में गई हैं।
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सूत्रों की मानें तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के बयान के बाद सपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर कब्जा बनाए रखने के लिए जोड़तोड़ और तेज कर दिया था।
सपा-प्रसपा ने और तीन जिला पंचायत सदस्यों को अपने पाले में कर लिया। अंदर खाने में अब सपा-प्रसपा प्रत्याशी के पास जिला पंचायत सदस्यों की संख्या 23 पहुंच गई है।
इधर, नामांकन पत्र खरीद की तारीख शुक्रवार को खत्म हो गई, लेकिन भाजपा के अलावा कांग्रेस, बसपा व अन्य किसी राजनैतिक दल के अधिकृत या समर्थन वाले प्रत्याशी ने नामांकन पत्र नहीं खरीदा।
इससे लगभग साफ हो गया है कि इटावा के जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी सपा-प्रसपा प्रत्याशी व निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अंशुल यादव के पास बनी रहेगी।
जिला पंचायत सदस्यों के गोवा टूर पर जाने की चर्चा
राजनैतिक गलियारों में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को सरगर्मी तेज है। चर्चा है कि जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते अधिकांश लोग गोवा के टूर पर निकल गए हैं।
इसके पीछे यह भी बात कही जा रही है कि दूसरे राजनैतिक दल जोड़-तोड़ करके जिला पंचायत सदस्यों को अपने पाले में न खींच लें। इसलिए इन लोगों को गोवा के टूर पर भेज दिया गया है।
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