इटावा। पुलिस की वर्दी देख कर जहां आम लोगों डर जाते हैं और आमतौर पर थाने के अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। ऐसे में सामुदायिक शौचालय अगर थाना परिसर में हो तो सोचिए क्या होगा।
आम लोगों को छोड़िए खास लोग भी एक बार थाना परिसर में बने सामुदायिक शौचालय का प्रयोग करने में ठिठकेंगे जरूर। ऐसा ही चकरनगर क्षेत्र में हो रहा है। यहां दो थाना परिसर के भीतर सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया है, जहां पुलिस का पहरा रहता है, तो सोचिए कौन इस शौचालय में जा सकता है।
इसलिए इन क्षेत्रों के अधिकांश लोग खुले में शौच को मजबूर है। ऐसे में प्रधानमंत्री देश के प्रत्येक गांव खुले में शौच से मुक्त होने का सपना पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
चकरनगर संवाद के मुताबिक बीहड़ी क्षेत्र के चकरनगर ब्लाक में 37 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण ग्राम पंचायत स्तर पर कराया गया है। प्रत्येक शौचालय के निर्माण में चार लाख 20 हजार रुपये खर्च किया गया है।
इनमें क्षेत्र में दो सामुदायिक शौचालय ऐसे स्थान पर बनाए गए हैं, जहां महिलाएं तो क्या पुरुष भी जाने में डरते हैं। तत्कालीन सीडीओ ने अधिकारियों के दबाव में सहसों व चकरनगर थाना परिसर में लाखों रुपये खर्च करके सामुदायिक शौचालय बनवा दिया था।
थाना परिसर में बने इन दोनों शौचालयों के आसपास पुलिस का पहरा रहता है। थाना गेट पर संतरी पहरा संगीन के साथ रायफल लेकर मुस्तैद रहता है। यह देख ग्रामीण सुलभ शौचालय का इस्तेमाल करने नहीं जाते हैं।
अगर किसी ने वर्दी वालों के बीच से गुजर कर शौचालय तक जाने की हिम्मत जुटाई भी, तो पहले उसे संतरी के सवालों से दो-चार होना पड़ता है।
फिर थाने के भीतर पुलिस वालों के पूछताछ के बीच से गुजरना पड़ता है, तब वह शौचालय तक पहुंच पाता है। ग्रामीण इन सब झंझटों में फंसना नहीं चाहते हैं। इसलिए खुले में शौच को मजबूर हैं।
मकसद नहीं हो रहा पूरा
सरकार ने शहर के लेकर गांव तक सामुदायिक शौचालय इस मंशा से बनवाए थे कि जिनके घरों में शौचालय नहीं है, वह खुले स्थान पर शौच नहीं जाएंगे। अफसर थाना परिसर में सामुदायिक शौचालय का निर्माण करा सरकार की इस मंशा का पलीता लगा रहे हैं।
कब होगी जिम्मेदारों पर कार्रवाई
थाना परिसर में सरकार के लाखों रुपये खर्च कर सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करा दिया गया। इससे इन शौचालयों को बनवाने का फायदा ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। थाना परिसर में इन शौचालयों के निर्माण के लिए तत्कालीन सीडीओ, पंचायतराज विभाग, प्रधान व पंचायत सचिव जिम्मेदार हैं। इन पर कब और क्या कार्रवाई होगी। यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
सामुदायिक शौचालय का निर्माण सार्वजनिक जगह पर ही कराया जा रहा था। तत्कालीन जिले के कुछ बड़े अफसरों के दबाव में थाना परिसर में सामुदायिक शौचालय स्थापित कराया गया था। ग्रामीणों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है। पुलिस थाना परिसर में शौच के लिए कौन जाएगा। उसका प्रयोग तो पुलिस वाले ही कर रहे हैं। - सहवीर सिंह यादव, पूर्व प्रधान सहसों
ब्लाक क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था आम ग्रामीणों के लिए की गई है। कुछ पंचायतों के शौचालय तत्कालीन सीडीओ के निर्देश पर थाना परिसर में बना दिए गए थे। ताकि शौचालयों की सुरक्षा बनी रहे। शौचालयों के रखरखाव के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर मासिक तौर पर लगभग 10 हजार खर्च किया जाता है। - आलोक चौहान, एडीओ पंचायत
सामुदायिक शौचालय पुलिस अभिरक्षा में होने के कारण शौच के लिए जाने की हिम्मत नहीं होती है। सरकार को चाहिए की सार्वजनिक स्थान पर सामुदायिक शौचालय बनाना चाहिए। - सत्यवीर सिंह
सामुदायिक शौचालय आम ग्रामीणों के लिए होते हैं। इन्हें सरकारी परिसर में बनाए जाने से आम लोग इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। जिस सरकारी विभाग के परिसर में होता है, उसी विभाग के कर्मचारी शौचालय का प्रयोग करते हैं। - कामिनी देवी
थाना परिसर में सामुदायिक शौचालय बना होने से शायद ही कोई ग्रामीण उसका प्रयोग करता हो। आज तक वह थाने के भीतर बना सरकारी शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए थाने के भीतर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके हैं। - जितेंद्र कुमार