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फिर बढा अहनैया नदी का जलस्तर, किसान परेशान

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तेज बारिश से हुई बाजरे की फसल नष्ट - फोटो : ETAWAH
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इटावा। अनहैया नदी के उफान आने से बसरेहर ब्लाक के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें छाई हुई है। पांच दिन पूर्व नदी में उफान आने से कबूली गांव के ग्रामीणों की धान की फसल डूब गई थी।
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दो दिनों से हो रही रुक-रुक कर बारिश के कारण नदी का जलस्तर और बढ़ गया है। जिससे नदी के किनारे खड़ी धान की फसल डूब गई है। करीब एक दर्जन से अधिक गांव के किसान इस विपदा से परेशान हैं।
मूंज गांव के किसान कन्हैया लाल, गोपी कुमार, आनंद बाबू, रक्षपाल ने बताया कि दो दिन से लगातार हो रही बारिश के कारण अहनैया नदी दोबारा से उफान पर आ गई है। उनके सामने फसल बचाने का संकट पैदा हो गया है।
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नदी किनारे के खेतों में खड़ी धान की फसल में पानी भरना शुरू हो गया है। अगर जलस्तर और बढ़ा तो सैकड़ों बीघा किसानों की धान की फसल डूब कर नष्ट हो जाएगी। उन्होंने बताया नदी के किनारे टिसुआदेव, नगला लक्षू, फर्दपुरा, मूंज, कबूली ,छतरपुरा, टकीपुरा, रमपुरा सहित कई गांव हैं।
ऊसराहार। ताखा क्षेत्र में तेज हवा व बारिश से फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि अब जो बारिश हो रही है, इससे फसलों को काफी नुकसान हो रहा है। पानी की आवश्यकता किसी भी फसल को नहीं है। इससे बाजरा, धान मूंगफली में फूल पड़ रहा है।
बारिश से फूल झड़ जाता है। जिससे पैदावार में नुकसान होता है। इस बारिश से बाजरा की फसल में ज्यादा नुकसान है। बाजरा की फसल खेतों में गिर गयी है।
सुखैया निवासी किसान सुंदर लाल अग्निहोत्री ने बताया कि हमारी आठ बीघा बाजरा की फसल खड़ी थी जो तेज हवा और बारिश के कारण पूरी तरह से खेत में गिरकर नष्ट हो चुकी है।
बम्हनीपुर रामनगर निवासी किसान सुखदेव प्रसाद ने बताया कि छह बीघा बाजरा की फसल गिर कर खराब हो गई है। बम्हनीपुर रामनगर निवासी किसान सीताराम तिवारी ने बताया कि उनकी तीन बीघा मूंगफली की फसल बारिश के पानी भरने से फसल पूरी तरह से पीली पड़ चुकी है। फसल नष्ट होने से लागत निकलना भी मुश्किल है।

अहनैया नदी में आए उफान से डूबी फसल दिखाता किसान। संवाद - फोटो : ETAWAH

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