इटावा। नदियां बेहद महत्वपूर्ण है और नदी संरक्षण के लिए कानून बनाया जाना चाहिए। नदियां केवल मनुष्य के उपयोग के लिए नहीं हैं। नदियों का स्वतंत्र अस्तित्व है। नदियों पर अतिक्रमण को परिभाषित किया जाना चाहिए।
नदियों के कुछ दूर तक नदी की जमीन हो, यह बेहद जरूरी है। नदियों के किनारे पौधरोपण भी किया जाना चाहिए। यमुना-वृंदावन में यमुना मिशन के तहत नदी के किनारे 8 किलोमीटर तक पौधे लगाए गए हैं।
यह बात राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संस्थापक केएन गोविंदाचार्य ने अपनी यमुना दर्शन यात्रा व प्रकृति केंद्रित विकास संवाद के तहत गुरुवार को यमुना तट स्थित सुमेर सिंह किला अतिविशिष्ट गेस्ट हाउस में पत्रकारों से कही।
भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री व वक्ता ने कहा कि भारत की असली ताकत प्रकृति है और प्रकृति की अनदेखी कर देश का विकास संभव नहीं है। प्रकृति को ध्यान में रख कर ही देश का विकास करना होगा अन्यथा प्राकृतिक आपदाओं का बढ़ना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि गोवंश हमारे अध्यात्म का आधार है, इनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। सिर्फ गोवंश की रक्षा की घोषणा से कुछ नहीं होगा, इनके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
उन्होंने सुबह यमुना जी की पूजा कर आरती की। इसके बाद कहा कि सरकारों ने नदियों और गाय को लेकर जो कार्य किए हैं उसके लिए उनका धन्यवाद।
बताया कि अभियान के तहत वह यमुना नदी के किनारे बसे नगरों का भ्रमण कर रहे हैं। वह अभियान के तहत उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश होते हुए उत्तर प्रदेश आए हैं। इसका समापन 17 सितंबर को दिल्ली में होगा।
पत्रकार वार्ता के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव राजपूत, जिला संघचालक राम नरेश शर्मा, विनोद चंद्र पांडे, महामंत्री अन्नू गुप्ता, भाजपा मीडिया प्रभारी रोहित शाक्य आदि रहे।
यमुना जी की पूजा करते भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री व विचारक- फोटो : ETAWAH