इटावा। बाढ़ के दौरान कच्चा मकान गिर गया या पक्का दरक गया अथवा दीवार गिर गई। मुआवजा अधिकतम चार हजार व न्यूनतम 3200 रुपये ही मिलेगा। अभी तक अफसरों का आकलन है अकेले चकरनगर इलाके में मकान गिरने व दरकने से जुड़े मामलों में तकरीबन तीन करोड़ रुपये का मुआवजा पीड़ितों को देना होगा।
यमुना और चंबल का जलस्तर बढ़ने से पिछले दिनों चकरनगर, बढ़पुरा ही नहीं शहर के कुछ इलाके ज लमग्न हो गए थे। कई लोगों को कच्चे घर गिर गए थे। तो कई पक्के मकानों की दीवार टूट गई थी, तो कई मकानों में दरार आ गई।
बाढ़ के हालात में देखते हुए प्रशासन को एनडीआरएफ व एसडीआरएफ को बुलाना पड़ा था। इन टीमों ने तमाम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया था। नदियों जलस्तर कम होने पर गांवों में पानी कम हुआ, तो पलायन करने वाले लोग अपने घरों को वापस लौट गए।
कच्चा मकान ढहने से लोग परिवार के साथ खुले में प्लास्टिक डालकर रहे हैं। कई लोग मकानों में दरार आने या क्षतिग्रस्त होने की वजह से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
इधर, प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के घरों में हुए नुकसान का आकलन किया, तो पता चला कि 31 गांवों में 756 लोगों के मकान गिर गए हैं या क्षतिग्रस्त हुए है।
अभी तक खेती और गृहस्थी के नुकसान का आकलन राजस्व विभाग की टीम कर रही है। एक अफसर का कहना है कि गुरुवार तक बाढ़ से हुए लोगों को नुकसान का आकलन पूरा कर लिया जाएगा। इसकी रिपोर्ट आला अफसरों को भेजी जाएगी। इसके बाद आपदा राहत कोष से पीड़ितों को तय मुआवजा दिया जाएगा।
बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए कच्चे-पक्के घरों व झोपड़ी वाले पीड़ितों को नुकसान के आधार पर अधिकतम चार हजार और न्यूनतम 32 सौ रुपये की सहायता दी जाएगी। गृहस्थी, मवेशियों व खेती के नुकसान का आकलन किया जा रहा है। यह काम पूरा होने के बाद सहायता राशि की मांग की जाएगी। - यदुवीर सिंह, तहसीलदार चकरनगर