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गोशालाएं खाली, अन्ना गोवंश खड़ी फसलों को बना रहे निवाला

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बकेवर गौशाला में चारा काटने वाली मशीन का मोटर खराब होने पर सूखा चारा खाते गोवंश - फोटो : ETAWAH
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इटावा। गोशालाओं की दशा सुधर नहीं रही है। कहीं गोशाला खाली हैं, तो कहीं अन्ना गोवंश किसानों की खड़ी फसलों को निवाला बना रहे हैं। वहीं कुछ गोशाला में गोवंशों को केवल सूखा भूसा ही खिलाया जा रहा है।
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इससे गोवंश बीमार हो रहे और उनकी जान जा रही है। गोशालाओं की व्यवस्था सुदृढ़ करने के शासन और प्रशासन के आदेशों को नीचे अफसर हवा में उड़ा दे रहे है। यही वजह है कि गोशालाओं की स्थिति में सुधार नजर नहीं हो रहा है।
चकरनगर संवाद के मुताबिक क्षेत्र के गोआश्रय स्थल खाली पड़े हैं। गोवंश किसानों की खेतों में खड़ी फसलों को निवाला बना रहे हैं। गोवंश गोशालाओं की जगह चौराहों पर अपना ठिकाना बनाए हुए हैं।
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प्रशासनिक आंकड़ों में अनेठा गोशाला में 110, सहसों में 73, नौगांवा में 35, हरौली बहादुरपुर में 15 गोवंश संरक्षित है। लेकिन बड़ी संख्या में गोवंश पेट भरने के लिए खेतों में लगी फसलों को उजाड़ कर किसानों की समस्याओं को बढ़ा रहे हैं।
इतना ही नहीं गोशालाओं में रहने की बजाय गोवंश सड़कों और मुख्य मार्गों के साथ ही हाईवे पर घूम रहे हैं। इससे दुकानदारों व राहगीरों को आवागमन में परेशानी हो रही है। जब गोशालाओं के गेट खुले पड़े है, तो आखिर गोवंश सड़कों पर नहीं टहलेंगे, तो और क्या करेंगे।
गोशालाओं में हो रही गोवंशोें की मौत और दुर्गति को संज्ञान में लेते हुए प्रशासन ने गोवंशों को जंगल में चराने के लिए आदेश दिए। इन गोवंशों को खुले में चराने के लिए एक-एक चरवाहा रखा गया। ग्रामीणों की मानें तो गोशालाओं के चरवाहे घरों में रहकर केवल कागजों पर गोवंश चरा रहे हैं और किसान अपनी फसल बचाने के लिए दिन-रात गोवंशों को खेतों से खदेड़ने में जुटे हैें।
गोशालाओं में गोवंशों को स्वस्थ रखने के लिए चरवाहे हरा चारा खिलाने के जंगल में प्रतिदिन ले जाते हैं। चरवाहे सुबह गोवंशों को जंगल में ले जाते हैं और शाम को गोशाला में लाकर बंद करते हैं। सभी को आश्रय केंद्र पर नियमित तौर से गोवंशो का ख्याल रखा जा रहा है। - सतीश चंद्र पांडे, खंड विकास अधिकारी, चकरनगर
गोवंशों के मौत के बाद हरकत में आया प्रशासन, पहुंचे डीडीओ
ऊसराहर। ताखा में दस गोवंशो की मौतों के बाद प्रशासन हरकत में आ गया। शनिवार को डीडीओ ने क्षेत्र की दो गोशालाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही गोवंशो के लिए हरे चारे की व्यवस्था करने के निर्देश जिम्मेदारों को दिए।
परौली रमायन की गोशाला से ताखा भेजे गए 48 गोवंशों में एक सप्ताह में 10 की मौत होने की खबर को समाचार पत्रों में शनिवार को प्रमुखता से प्रकाशित किया। तो प्रशासन हरकत में आ गया।
शनिवार की सुबह जिला विकास अधिकारी दीनदयाल ने बीडीओ आशुतोष कुमार के साथ मुरचा टाडेहार व ऊसराहार गोशाला का निरीक्षण किया। मुरचा में गोवंशों के खाने के लिए सूखा भूसा नांदों मे डाला गया था।
यह देख डीडीओ ने नाराजगी जताई। उन्होंने बीडीओ को गोवंशों के लिए हरे चारे की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि गोचर की जमीन पर भी हरा चारा उगाने की व्यवस्था करने की बात कही।
बीडीओ ने कर्मचारी लगाकर गोशाला परिसर में भरे पानी व कीचड़ को साफ करा दिया। इससे गोशाला में संरक्षित गोवंशों को राहत मिली है। इस गोशाला में 18 गोवंश रमायन से भेजे गए थे।
इसमें आठ अभी तक दम तोड़ चुके हैं। अब आसपास छुट्टा घूम रहे 11 गोवंशों को पकड़कर गोशाला में रखा गया है। इससे यहां पर गोवंश की संख्या अब 21 हो गई है।
इधर, ऊसराहार की गोशाला में निरीक्षण के दौरान एक गोवंश बीमार मिला। पूछने पर पशु चिकित्सक डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि लगातार इलाज करने के बाद भी गोवंश खड़ा नहीं हो पा रहा है।
प्रधान प्रतिनिधि आलोक मिश्रा ने उन्हें बताया उनकी पंचायत में गोचर की जमीन ही नही हैं। इसलिए हरे चारे की समस्या आ रही है। इस दौरान ग्रामीणों ने ऊसराहार में घूम रहे अन्ना मवेशियों को भी गोशाला में भेजने की मांग की डीडीओ से की।
डीडीओ ने बताया कि गोवंशो की देखभाल के लिए डॉक्टरो की टीम सुबह शाम गोशालाओं में जा रही है। गोवंशो को स्वस्थ करने की पूरी कोशिश की जा रही।
चारा काटने की मशीन खराब, सूखा भूसा खा रहे गोवंश
बकेवर। क्षेत्र की गोशालाओं में गोवंशों के लिए हरे चारे की व्यवस्था नहीं है। बकेवर की गोशाला में चारा काटने वाली मशीन की मोटर खराब होने से गोवंशों को सूखा भूसा दिया जा रहा है। बहादुरपुर गोशाला का गेट ही टूट गया है।
अमर उजाला की टीम ने शनिवार को गोशालाओं की स्थिति मौके पर जाकर देखी। बकेवर कस्बा स्थित जलकल परिसर में बनी गोशाला में 140 गोवंश मिले। इन गोवंशों को हरे चारे की जगह सूखा भूसा खिलाया जा रहा था।
इस बारे में पूछने पर गोशाला की देखभाल करने वाले शख्स ने बताया चारा काटने वाली मशीन की मोटर खराब है। इस वजह से पिछले पांच दिन से गोवंशों को हरा चारा नहीं मिल पा रहा है।
खेत में हरा चारा देने के लिए जुनरी खड़ी है, जो काट कर गोशाला में लाई जाती थी। नगर पंचायत बकेवर के ईओ अजय कुमार ने बताया कि चारा काटने वाली मशीन को मरम्मत के लिए भेजा गया है। इसके चलते गोवंशों को भूसे की सानी खिलाई जा रही है। मशीन मरम्मत होकर आते ही हरा चारा देने शुरू कर दिया जाएगा।
इधर बहादुरपुर गांव की गोशाला का मुख्य गेट टूट गया है। इस कारण गोवंश सड़क पर टहलते और बैठे नजर आए। पशु चिकित्सालय बकेवर के डॉ.सोमेश निगम, डॉ. अनिलवीर सिंह चौहान ने इस गोशाला को देखने पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया।
ह्यग्रामीणों का कहना था कि जो गोवंश बाहर घूम रहे है, उन्हें गोशाला में बंद किया जाए। अन्ना गोवंश उनकी खेतों में खड़ी बाजरा की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। डॉक्टरों ने ग्रामीणों को गोवंशों को गोशाला में बंद कराए जाने का आश्वासन देकर शांत कराया।

अनेठा गांव की खाली पड़ी गौशाला- फोटो : ETAWAH

ताखा की गौशाला का निरीक्षण करते जिला विकास अधिकारी- फोटो : ETAWAH

चकरनगर चौराहे पर बैठे आवारा गोवंश- फोटो : ETAWAH

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