इटावा। सैफई के आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में साफ सफाई का काम (सैनीटेशन) कराने वाले फर्म संचालक के खिलाफ सैफई थाने में गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। विश्वविद्यालय कुल सचिव ने फर्म संचालक (प्रोपराइटर) पर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक ईपीएफ अंशदान का भुगतान न करने का आरोप लगाया है।
कुल सचिव सुरेश चंद्र शर्मा ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि मैसर्स कु शाबरीन चौधरी बिल्ंिडग मैटेरियल सप्लायर्स एंड प्लंबरिंग वर्क्स फर्म विश्वविद्यालय में वर्ष 2007 से सफाई कार्य करा रही है। फर्म के संचालक सिराज चौधरी विश्वविद्यालय से अपनी फर्म के कर्मियों का ईपीएफ अंशदान तो प्राप्त करते रहे, लेकिन उसका भुगतान नहीं किया।
सरकारी धन के गबन की कुल धनराशि अप्रैल 2007 से मार्च 2017 तक कुल एक करोड़ 53 लाख 32 हजार 454 रुपये है। उन्होंने बताया कि शासन स्तर से समय समय पर आदेश दिए गए है कि जो फर्म ईपीएफ जमा न करे, ऐसे सेवा प्रदाताओं के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाए। सैफई थाना प्रभारी चंद्रदेव यादव ने धारा 420 व 406 में मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में ईपीएफ गबन मामले में शाबरीन फर्म के संचालक पर विश्वविद्यालय प्रशासन स्तर से पहले ही कार्रवाई की संस्तुति की जा चुकी थी। कुल सचिव सुरेश चंद्र शर्मा ने बताया कि संबंधित फर्म के कर्मचारी अक्सर ईपीएफ अंशदान जमा न करने की शिकायत करते थे।
इसके अलावा अस्पताल प्रशासन के आकस्मिक निरीक्षण में सफाईकर्मी तथा सुपरवाइजर ड्यूटी के दौरान यूनिफार्म में नहीं दिखते थे। शाबरीन फर्म के मालिक सिराज चौधरी ने अक्तूबर 2019 से जनवरी 2020 तक के बिलों को भी प्रस्तुत नहीं किया। जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन गंभीरता से ले रहा है। शाबरीन फर्म को पत्र भी लिखे गए। यह फर्म एक साथ चार-चार महीनों के बिल पेश कर रही है। इसमें ईपीएफ भी जमा नहीं किया जा रहा है। इस फर्म का काम उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के मापदंड के अनुसार नहीं है।
उन्होंने कहा कि फर्म के मालिक ने कर्मचारियों एवं सुपरवाइजरों की सही संख्या उपलब्ध नहीं कराई है। जो कर्मचारी व सुपरवाइजर फर्म से जुड़े हैं। उन्हें पहचान पत्र और वर्दी नहीं दी गई और न ही उनके काम का मासिक रोस्टर उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने बताया कि इन कमियों के सामने आने पर विश्वविद्यालय की तरफ से छह सदस्यीय कमेटी बनाई गई। इसमें सदस्य के रूप में प्रतिकुलपति, वित्तीय अधिकारी, रजिस्ट्रार, चिकित्सा अधीक्षक, डीन व सेनिटेजन अधिकारी शामिल हैं। कमेटी ने जांच के दौरान फर्म को दोषी पाया। इसके बाद फर्म संचालक के खिलाफ सैफई थाने में 21 फरवरी को तहरीर दी गई। इस पर फर्म संचालक के खिलाफ मामला दर्ज हो गया है। उन्होंने कहा कि अभी सफाई का काम यही फर्म कर रही है। सफाई कार्य के टेंडर की प्रक्रिया त्वरित गति से जारी है। यह टेंडर जैसे ही दूसरी फर्म के पास जाएगा। वैसे ही इस फर्म को हटा दिया जाएगा।