इटावा। पंचायत उद्योग में संचालित सेनेटरी नैपकिन इकाई पुन: संचालित किए जाने में सबसे बड़ा रोड़ा तैयार माल की खपत न होना और शिक्षा विभाग से उधारी का भुगतान न होना है। ढाई साल पहले बंद होते-होते करीब 40 हजार पैकेट नैपकिन तैयार तो हो गए परंतु उनकी बिक्री नहीं हो सकी। उधर, बेसिक शिक्षा विभाग से दो लाख रुपये का भुगतान समय से नहीं मिला। इस वजह से नैपकिन इकाई का आर्थिक आधार पूरी तरह से चरमरा गया। इकाई शुरू करने के लिए जो लागत लगाई थी वह भी डूब गई।
वर्ष 2015 में करीब तीन लाख रुपये की लागत से पंचायत उद्योग में सेनेटरी नैपकिन तैयार करने का काम सरकारी स्तर पर शुरू हुआ था। ढाई तीन साल तक चलने के बाद इकाई बंद हो गई। अब इकाई को फिर से संचालित करने के लिए पंचायत उद्योग के पास आवश्यक धनराशि भी नहीं है। तैयार माल को बाजार नहीं मिला। फलस्वरूप करीब 40 हजार नैपकिन बिना बिक्री के पड़े हुए हैं। इनकी बिक्री से मिलने वाली धनराशि जुटाकर इकाई को फिर से खड़ा करने की कोशिश हो रही है।
जिला पंचायत राज अधिकारी यतेंद्र सिंह ने बताया कि 100 पैकेट का मूल्य 1500 रुपये है। माल की लागत निकल आए इसलिए सभी सहायक विकास अधिकारियों को पत्र लिखकर ग्राम पंचायतों में 100-100 पैकेट सप्लाई करने की योजना बनाई थी। यदि सभी 471 ग्राम पंचायतों में इनकी सप्लाई हो जाती तो कम से कम लागत निकल आती। इसी बीच ग्राम पंचायतों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। अब पहले तैयार माल की बिक्री करके फिर इकाई को संचालित करने के प्रयास किए जाएंगे।