इटावा। पंचायत चुनावों में आरक्षण की अधिसूचना जारी होने के बाद अब संभावित दावेदारों के बीच आरक्षण का गुणा-भाग होने लगा है। नियमावली के प्रावधानों के मुताबिक जिले की 168 ग्राम पंचायतों के दावेदारों की नींद उड़ी हुई हैं। जहां वर्ष 1995 के बाद से अभी तक एक बार भी अनुसूचित जाति का ग्राम प्रधान निर्वाचित नहीं हो सका है।
उप्र में पंचायत राज अधिनियम के अंतर्गत 1995 के पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू हुआ। इटावा में आठ ब्लॉकों में कुल 471 ग्राम सभाओं में से 168 ग्राम सभाएं ऐसी हैं जहां 1995, 2000, 2005, 2010, 2015 के चुनावों में चक्राक्रमानुसार आरक्षण होने के बाद भी अनुसूचित जाति को आरक्षण नहीं मिल सका। ब्लॉक बढ़पुरा की 61 में से 18 ग्राम पंचायत, ब्लॉक चकरनगर की 41 में से चार ग्राम पंचायत, ब्लॉक सैफई की 45 में से 26 ग्राम पंचायत, ब्लॉक ताखा की 42 में से 15 ग्राम पंचायत, ब्लॉक बसरेहर की 67 में से 27 ग्राम पंचायत, ब्लॉक जसवंतनगर की 61 में से 24 ग्राम पंचायत, ब्लॉक भरथना की 63 में से 24 ग्राम पंचायत, ब्लॉक महेवा की 91 में से 30 ग्राम पंचायत है। अनारक्षित रही सीटों पर आरक्षण की तलवार ने दावेदारों की बैचेनी बढ़ा दी है।
कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष उदयभान सिंह यादव ने कहा कि उन्होंने पहले ही यह मामला उठाया था। सरकार ने भी उनके प्रस्ताव के मुताबिक आरक्षण का प्रावधान किया। इससे सभी वर्गों को समान अवसर प्राप्त होने का मार्ग प्रशस्त होगा।