इटावा। सदियों से बीहड़ के अस्तित्व को समेटे बह रही यमुना नदी को अब अलग पहचान मिलने वाली है। इसके इर्द-गिर्द नजर आने वाले पहाड़ी जैसे मिट्टी के टीलों और बबूल के कटीले जंगलों की जगह पिकनिक स्पॉट नजर आएगा। लखनऊ में गोमती की तर्ज पर यमुना पर रिवर फ्रंट बनाने का प्रस्ताव सदर विधायक सरिता भदौरिया ने जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के जरिए शासन को सौंपा है। सरिता भदौरिया का कहना है कि रिवर फ्रंट की परिकल्पना साकार हुई तो यमुना नदी का जल निर्मल होगा। जलीय जीवों का अस्तित्व भी बचा रहेगा। साथ ही यमुना नदी की पवित्रता से आम आदमी की दूरियां मिट जाएंगी।
धूूमनपुरा के शिवमंदिर घाट से लेकर कामेत बाईपास तक करीब दो किलोमीटर तक के इलाके में रिवर फ्रंट बनने की योजना है। इससे यमुना के घाट
जीवंत होंगे। यहां का नजारा भी काफी हद तक लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट जैसा होगा। यमुना के साथ लोगों का भावात्मक लगाव फिर से बढ़ेगा। किनारों को पिकनिक स्पॉट के तौर पर विकसित किया जाएगा। दुर्लभ प्रजातियों के जीव जंतुओं और विभिन्न प्रजातियों की चिड़ियों का कलरव नजदीक से सुनाई पड़ेगा।
भाजपा विधायक सरिता भदौरिया ने बताया कि प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह से लखनऊ में भेंटकर उन्होंने इटावा में रिवर फ्रंट बनाए जाने का प्रस्ताव दिया है। इससे न केवल यमुना नदी की स्वच्छता कायम होगी बल्कि प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजना अर्थगंगा के भी उद्देश्यों की पूर्ति होगी।
30 एमएलडी गंदा पानी प्रदूषित कर रहा है यमुना को
यमुना में शहर से निकलने वाला नाले नालियों का गंदा पानी गिरता है। इस वजह से नदी प्रदूषित रहती है। पूरा पानी काला दिखाई पड़ता है। यमुना एक्शन प्लान के नाम पर पिछले 30 सालों में अरबों रुपये खर्च कर दिए गए। इसके बाद भी यमुना को साफ नहीं किया जा सका। यहां सबसे पहले 10 एमएलडी का जल शोधन प्लांट लगाया गया। जो नाकाफी है। इसके अलावा 13 एमएलडी का शोधन यंत्र और तैयार हो चुका है। समस्या इससे भी नहीं सुलझ रही। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यमुना में शहर से रोजाना 30 एमएलडी (मिट्रिक टन डेली) गंदा पानी निकलकर यमुना में जा रहा है। सात एमएलडी बिना शोधन के ही यमुना में गिरता है। फिलहाल पूरा 30 एमएलडी ही यमुना में सीधे गिर रहा है क्योंकि प्लांट तकनीकी खामी के कारण बंद हैं।
घाटों के चारों ओर फैली है गंदगी
इटावा। धूमनपुरा शिव मंदिर घाट से लेकर कामेत बाईपास पुल तक यमुना नदी के घाटों पर भीषण गंदगी है। पहले लोग घाटों के आसपास घूमने जाते थे। यहां दुर्गंध के कारण खड़ा होना मुश्किल है।
जलीय जीवों का अस्तित्व है खतरे में
इटावा। पर्यावरणविद् डॉ. राजीव चौहान का कहना है कि यमुना नदी में कछुआ, मछली जैसे तमाम जलीय जीवों का अस्तित्व गंदगी के कारण खतरे में है। रिवर फ्रंट का प्रस्ताव आज के समय की जरूरत है। यमुना की पवित्रता, जलीय जीवों का जीवन बचाने की दिशा में यह एक सार्थक प्रयास होगा। सरकार को इस प्रस्ताव को शीघ्र स्वीकृत कर देना चाहिए।