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अपने पुराने कलेवर में ही लगेगी इटावा की नुमाइश

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इटावा। लंबे इंतजार के बाद अब इटावा महोत्सव का आयोजन सुनिश्चित हो गया है। दिसंबर माह में लगने वाली इटावा की नुमाइश इस बार भी पुराने कलेवर में ही लगेगी। कोरोना काल की परेशानियों के चलते विलंब होने के बाद 31 जनवरी से शुरू होने जा रही नुमाइश की तैयारियां शुरू हो चुकीं हैं। यहां पर रंगाई-पुताई के साथ ही झूले लगने लगे हैं और बाहर के दुकानदार अपनी दुकानें भी लगाने लगे हैं। हालांकि इस बार प्रदर्शनी पंडाल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर लोगों में निराशा जरूर है। इस बार सप्ताह में सिर्फ एक ही सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रावधान रखा गया है।
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इटावा महोत्सव स्थल पर साफ-सफाई जारी है और लाइटिंग एवं साउंड लगाने का काम भी किया जा रहा है। कोविड-19 व स्कूली बच्चों की जारी परीक्षा को देखते हुए इस बार साउंड सिस्टम का दायरा कम कर दिया गया है। इस बार नुमाइश स्थल से पुलिस लाइन तिराहा, पक्का तालाब चौराहा व बाइस ख्वाजा रोड तक ही साउंड सिस्टम लगाए जा रहे हैं।
31 जनवरी को इटावा महोत्सव अपने परंपरागत रूप में शुरू होगा और खानपान, झूलों के अलावा कई चीजों की दुकानें भी लगेंगी। सर्कस इस बार नहीं आ रहा है। जहां तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजनों का सवाल है तो इटावा महोत्सव कमेटी व प्रशासनिक अधिकारियों की एक बैठक होनी शेष है। इसमें इन आयोजनों को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इटावा महोत्सव के लिपिक कमलेश बाबू व यहां लगने वाले झूलों व दुकानों के ठेकेदार टीपू यादव ने बताया कि नियत समय से इतर आयोजन होने से इस बार कुछ अंतर आने की संभावना है, लेकिन लोगों में नुमाइश के आयोजन की घोषणा को लेकर उत्साह भी है।
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