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मरा कौआ व चार बेहोश चमगादड़ मिलने से लोगों में बर्ड फ्लू का अंदेशा

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चकरनगर/बकेवर। चकरनगर कस्बे में कौआ मरा हुआ और चार बेहोश चमगादड़ मिलने से बर्ड फ्लू के खतरे से लोग सशंकित हो उठे। उनको शंका है कि सेंक्चुअरी क्षेत्र में सैलानी पक्षी आने से बर्ड फ्लू का संक्रमण फैल रहा है, लेकिन सेंक्चुअरी अमला व चिकित्सक इन घटनाओं का कारण ठंड बता रहे हैं। उधर, बकेवर क्षेत्र में सामाजिक वानिकी व पशुपालन विभाग ने रविवार को पॉल्ट्री फार्मों का निरीक्षण कर उनके संचालकों संग बैठक की। उन्हें फ्लू से बचाव व सावधानियों के बारे में बताया।
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कस्बा चकरनगर के राजपुर रोड स्थित आबादी क्षेत्र में रविवार सुबह एक कौआ मृतक पड़ा देखा गया जिसको देखकर लोगों ने बर्ड फ्लू के खतरे की आशंका जताई। कस्बा चकरनगर से सटे नगला महानंद में सुबह ही चार चमगादड़ बेहोश अवस्था में मिलने पर ग्रामीण मुकेश यादव ने सेंक्चुअरी अमले को सूचना दी। विभाग की टीम उन चमगादड़ों को एकत्रित करके चिकित्सकीय परीक्षण के लिए ले गई।
कानपुर के प्राणी उद्यान में हुई पक्षियों की मौत का कारण बर्ड फ्लू निकलने से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में यहां भी बर्ड फ्लू की आशंका घर कर गई है। क्षेत्रीय लोग आशंका व्यक्त करते हैं कि विभाग भले ही न बताए, लेकिन क्षेत्रीय सेंक्चुअरी में सैलानी पक्षियों के आने से कहीं बर्ड फ्लू तो नहीं फैल रहा है।
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सेंक्चुअरी क्षेत्राधिकारी चकरनगर हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि मृत कौआ व बेहोश अवस्था में मिले चमगादड़ों के चिकित्सकीय परीक्षण में सर्दी से मौत होना पाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सर्दी के कारण ही चमगादड़ बेहोश हो गए थे जो धूप लगते ही उड़ गए। क्षेत्र में बर्ड फ्लू का कोई खतरा नहीं है। ग्रामीणों को आशंकित होने की जरूरत नहीं है।
पॉल्ट्री फार्मों का किया निरीक्षण
बकेवर प्रतिनिधि के अनुसार रविवार को लखना सामाजिक वानिकी के वन रेंज अधिकारी विवेकानंद दुबे व पशु चिकित्सालय महेवा के प्रभारी डा. शरद यादव के नेतृत्व में गठित टीमों ने गांव मेहंदीपुर और बकेवर स्थित पॉल्ट्री फार्मों का निरीक्षण किया। उन्होंने फार्म संचालकों के साथ बैठक कर उन्हें फ्लू से बचाव के लिए जागरूक किया और सावधानियां बताईं। अधिकारियों ने कहा कि फ्लू से संबंधी कोई लक्षण नजर आए तो वह तुरंत इसकी जानकारी नजदीकी पशु चिकित्सक व पशु पालन विभाग को दें। दोनों विभाग की टीमों ने सेंगर व यमुना नदी के किनारों की भी निगहबानी करके पक्षियों की जानकारी हासिल की। मेंहदीपुर और बकेवर सहित क्षेत्र में एक दर्जन छोटे-बड़े पॉल्ट्री फार्म हैं।
ये हैं बर्ड फ्लू के लक्षण
वन रेंज अधिकारी विवेकानंद दुबे ने बताया कि अभी तक जिले में किसी भी पक्षी में बर्ड फ्लू का कोई लक्षण नहीं मिला है। यह एवियन इनफ्लुएंजा वायरस एच5एन1 से पक्षियों में फैलता है और पक्षियों से मनुष्य में भी फैलने का खतरा रहता है। मुख्य रूप से मुर्गी, टर्की, मोर और बतख में इसके संक्रमण फैलने का खतरा है। इस बीमारी में पक्षियों को बहुत तेज बुखार हो जाता है, बहुत तेज प्यास लगती है, चलने-फिरने में बहुत दिक्कत होती है। गर्दन टूटने लगती है। इन लक्षणों के बाद पक्षी 24 घंटे के दौरान मर जाता है।
क्या करें, क्या न करें
पॉल्ट्री फार्म और घरेलू मुर्गी पालन करने वाले लोगों को अपने हाथ में दस्ताने और मुंह पर मास्क अवश्य लगाना चाहिए। कीटाणुनाशक घोल का छिड़काव करें। किसी भी तरीके से बाहर से आने वाले वाहन को भी कीटाणुनाशक घोल से गुजार कर ही अंदर आने दें। सभी मुर्गी पालक बाहर से पॉल्ट्री से संबंधित सामान न मंगवाएं।
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