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पंचकल्याणक महोत्सव में हुई जैनेश्वरी दीक्षाएं

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आचार्य पद मिलने के बाद गुरु सौभाग्य से गले मिलते आचार्य सुरत्न सागर। - फोटो : ETAWHA
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इटावा। चंबल तट स्थित श्री दिगंबर जैन महामृत्युंजय तीर्थक्षेत्र पर चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में रविवार को जैनेश्वरी दीक्षाएं, मुनि दीक्षा दिवस धूमधाम से मनाया गया। मुनि सुरत्न सागर से आचार्य पद का प्रदान किया गया। साथ ही तीन दीक्षार्थी को दीक्षाएं प्रदान की गईं। कार्यक्रम के दौरान सुबह 9 बजे से उबटन, हल्दी रस्म, मेहंदी रस्म, मंगला स्नान, गोद भराई उत्सव मनाया गया। आचार्य श्री सौभाग्य सागर के निर्देशन में गणधर वलय विधान एवं दीक्षार्णी गणों को आहार चर्या अभ्यास कराया गया। दोपहर 1 बजे से संगीतमय मेहंदी के बाद दीक्षार्थियों ब्रह्मचारी अतुल (करहल), सीमा (भिंड) एवं मधु (गोवर्धन) का केशलोचन किया गया।
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सदर विधायक सरिता भदौरिया, भरथना विधायक सावित्री कठेरिया, प्रसपा राष्ट्रीय महासचिव रघुराज सिंह शाक्य, जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव, डीएसपी प्रिंस जैन, भजन गायक रूपेश जैन, अजय धाकरे, मनीष यादव पतरे, ने भी आचार्य सौभाग्य सागर एवं आचार्य सुरत्न सागर का आशीर्वाद लिया। अतिथियों का स्वागत सत्कार जैन समाज के अध्यक्ष संजीव जैन ने किया।
मुनि श्री सौभाग्य सागर जी महाराज ने अपने परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री सुरत्न सागर जी महाराज को आचार्य पद से विभूषित किया। 20 वर्ष के कठोर साधना के बाद मुनि श्री सुरत्न सागर जी महाराज अब श्वेत पिच्छाधारी आचार्य श्री सुरत्न सागर जी महाराज कहलाएंगे। यह श्वेत पिच्छी भक्तगणों द्वारा आचार्य सौभाग्य सागर को प्रदान की गई थी। मुनि श्री आचार्य पदारोहण करते हुए आचार्य श्री ने यह श्वेत पिच्छी आचार्य बने सुरत्न सागर को सौंप दी। आचार्य पद पर जैन इतिहास में पहली पिता-पुत्र की जोड़ी अब मरसलगंज गौरव आचार्य श्री सौभाग्य सागर जी महाराज एवं आचार्य श्री सुरत्न सागर जी महाराज के रूप में होगी।
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महामृत्युजंय तीर्थ क्षेत्र पर भव्य जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव में एक मुनि, दो क्षुल्लिका के रूप में दीक्षाएं प्रदान की गई। इसमें करहल के अतुल भैया जी को मुनि सुतीर्थ सागर, भिंड की सीमा दीदी का क्षुल्लिका सुआर्य श्री माता जी एवं गोवर्धन की मधु दीदी को सुअथेष्ठ श्री माता जी के रूप में दीक्षाएं प्रदान की गई। इसके अलावा मुनि श्री दया श्री को उपाध्याय पद दिया गया।
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