लवेदी। पर्यावरण प्रेमी के रूप में पहचान बनाने में अब महिलाएं भी पुरुषों से कम नहीं हैं। बागवानी के लिए अब बड़ी जगह के बजाय घर के अंदर लॉन, छत, बरामदे में ही औषधियां, फूल और सब्जी उगाई जा रही है। लखना कस्बा के मुहाल ठाकुरान निवासी गृहिणी हेमलता सिंह राठौड़ सिम्पल ने अपने दो मंजिला मकान को चारों ओर से बाग के रूप में तब्दील कर रखा है। यहां पर वह प्लास्टिक के डिब्बों को आधा काटकर गमला बनाकर उसमें औषधि पौधे और फूल, सब्जियां उगा रही हैं। इस घर को देखने के लिए बहुत लोग आते हैं। उनके पति बृजेंद्र सिंह राठौड़, पुत्र प्रजित सिंह व बेटी गुनगुन सहयोग करती हैं।
हेमलता सिंह को बचपन से ही पौधों से प्यार था। शादी के बाद फतेहगढ़ से लखना आने पर कुछ पौधों को घर में लगाया। कोरोना काल में उन्होंने अपने मकान में बागबानी कर डाली। (संवाद)
जन्मदिन पर केक काटने की बजाय लगाती दो पौधे
हेमलता सिंह कहती हैं कि उनको पेड़-पौधों से बेहद प्रेम है। वह अपना व पति व बच्चों के जन्मदिन पर केक काटने के बजाय दो पौधे लगाकर पर्यावरण को बढ़ावा देने का काम करती हैं। इसी के सहारे घर में करीब दो सैकड़ा से अधिक पौधों की बागवानी हो गई है। वहीं, मूली, टमाटर, हरी धनिया, मिर्च, अदरक, सेम, मेथी की सब्जी बोई गई है।
घर पर ही जैविक खाद बनाती हैं
हेमलता सिंह बताती हैं कि घर पर परिजनों के लिए जो सब्जियां बनाई जाती हैं, उसके छिलकों को सड़ा करके जैविक खाद बनाने का काम करती हैं। साथ ही चाय पीने के बाद चाय की पत्ती भी इन पौधों को दम देने में सहायक है।
ये पौधे हैं उपलब्ध
अंजीर, अश्वगंधा, विष्णुकान्ता, पत्थरचटा, सुर्दशन, सतावरी, आक, एलोवेरा, इडविड बेबी, साइकस, समी, पाम के पौधे जो जड़ीबूटियों में काम आते हैं। वह भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा पान, नारियल, स्वीट पोटेटो को भी लगाया है।
छत पर लगे पेड़ पौधे- फोटो : ETAWAH