इटावा। इटावा बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 92 के फोरलेन में तब्दील होने की परियोजना में वन विभाग रोड़ा बना हुआ है। छह महीने से अधिक समय हो चुका है, प्रस्तावित फोरलेन निर्माण के लिए एनओसी नहीं मिल सकी है।
जबकि विश्व बैंक ने परियोजना के लिए बजट जारी कर दिया है। अब निर्माण एजेंसी परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) को काम शुरू कराने के लिए निविदाएं आमंत्रित करनी है। निविदाओं के लिए पहले वन विभाग की एनओसी चाहिए। जब एनओसी मिले तब काम आगे बढ़े।
इटावा बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग दक्षिण में मध्य प्रदेश और उत्तर में उत्तराखंड के लिपुलेख को जोड़ता है। केंद्र सरकार ने इटावा बरेली तक के भाग को फोरलेन में तब्दील करने की योजना को स्वीकृति देते हुए बजट जारी कर दिया है।
इटावा बरेली मार्ग को तीन फेज में विभाजित कर बनाया जाएगा। पहला फेज इटावा से मैनपुरी के बेवर तक लगभग 57 किमी तक का है। इसके लिए लगभग 186 करोड़ रुपये का बजट विश्व बैंक से जारी हो चुका है। मार्ग का सर्वे भी हो चुका है।
इटावा से दस किमी दूर कस्बा बसरेहर में बाईपास स्वीकृत हुआ है। बाईपास के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। जिले में करीब 18 गांवों की जमीन बाईपास के लिए अधिग्रहीत की जाएगी।
इस राजमार्ग के निर्माण का काम परियोजना क्रियान्वयन इकाई पीसीयू फतेहगढ़ को सौंपा गया है। पीसीयू के स्तर से मार्ग का सर्वे किया जा चुका है। जमीन के अधिग्रहण की कार्यवाही भी चल रही है। अब सिर्फ निविदा निकलना बाकी है। बस यहीं आकर सब कुछ अटक जाता है।
दिसंबर में मांगी थी एनओसी
इटावा से बेवर तक बनने वाले मार्ग का सर्वे कराने के बाद पीआईयू ने दिसंबर 2020 में वन विभाग से एनओसी मांगी थी। वैसे तीन महीने के अंदर एनओसी जारी होने का प्रावधान है। परंतु यहां तो छह महीने से भी अधिक का समय बीत चुका है। एनओसी का अभी कहीं अता पता नहीं है।
फोरलेन पर देना होगा टोल टेक्स
इटावा बरेली फोरलेन पर गुजरने वाले वाहनों को टोल टैक्स अदा करना होगा। इटावा और मैनपुरी की सीमा पर स्थित कर्री की पुलिया (सरसईनावर) पर टोल प्लाजा का निर्माण कराया जाएगा।
एनओसी के बाद ही जारी होंगे टेंडर
निर्माण एजेंसी पीआईयू के अधिकारी ललित ने बताया कि एनओसी के लिए वन विभाग में आवेदन किया जा चुका है। अनुमति मिलने के बाद ही टेंडर जारी हो सकेंगे।
शासन को भेजी गई है एनओसी
डीएफओ संजय सिंह का कहना है कि पीआईयू की तरफ से मांगी गई एनओसी पर स्थानीय स्तर से रिपोर्ट लगाकर शासन को भेज दी गई है। शासन और केंद्र सरकार को मिलकर इसकी अनुमति देनी है। सारी प्रक्रिया ऑनलाइन चल रही है। शीघ्र ही इस पर निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।