बकेवर (इटावा)। ढाई साल पहले पकड़े गए करीब सवा 15 लाख के सिक्कों के मामले में पुलिस ने कानपुर नगर के सात लोगों के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया है। इन सभी ने सिक्कों पर मालिकाना हक जताया था और कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने इन्हें सिक्के सौंप दिए थे। पुलिस ने इन पर गैर कानूनी तरीके से रकम को भेजने का आरोप लगाया है।
नवंबर 2017 में बकेवर पुलिस ने कानपुर से दिल्ली जा रही एक बस से 53 बोरियां बरामद की थीं। इसमें 15 लाख 29 हजार रुपये कीमत के सिक्के निकले थे। पुलिस ने बस चालक, हेल्पर और बस के मालिक पर मुकदमा दर्ज किया था। नई दिल्ली मजनू का टीला सिविल लाइंस के चालक अमरदीप सिंह और गाजीपुर के नंदगांव निवासी हेल्पर सुनील कुमार जेल भेजा था। इस घटना के करीब साल भर बाद कानपुर नगर निवासी सात लोगों ने सिक्कों पर मालिकाना हक जताते हुए कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था और सिक्के दिलवाने की गुहार लगाई थी। पुलिस ने कोेर्ट के आदेश पर इन लोगों को सिक्के दे दिए थे।
मामले के विवेचनाधिकारी अहेरीपुर चौकी इंचार्ज गोविंदहरि वर्मा ने सिक्कों को लेने वाले कानपुरनगर के कृष्णानगर मोहल्ला निवासी विजय प्रताप सिंह पुत्र नरेश सिंह, कुशल भाटिया पुत्र अजय भाटिया, आशीष गुप्ता पुत्र हरिप्रकाश गुप्ता, पुनीत भाटिया पुत्र रमेश भाटिया, नौधना निवासी अभिषेक पुत्र अनंत प्रसाद, नीरज ओमर पुत्र सीताराम और कानपुर नगर निवासी मनोज सिंह पुत्र नत्थू सिंह को भी मामले में आरोपी बनाया है। विवेचक ने बताया कि विधिक राय के बाद इन सातों लोगों के खिलाफ 25 मार्च को कोर्ट में आरोपपत्र प्रस्तुत किया है।
उन्होंने बताया कि सातों लोगों ने कानपुर रिजर्व बैंक शाखा से कटे फटे नोट बदलने का लाइसेंस तो लिया हुआ है। लेकिन वह इस रकम को किसी यात्री वाहन में बोरियों में भरकर एक से दूसरे राज्य नहीं भेज सकते हैं।