इटावा। बारिश के बाद मौसम बदलने से शुरू हुआ वायरल, डेंगू, खांसी व जुकाम लोगों को परेशान कर रहा है। ऐसे में रोजाना एक हजार से ज्यादा मरीज अपनी जांच व इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल आ रहे हैं।
पैथोलॉजी में जांच कराने के लिए मरीजों को घंटों लाइन में नंबर लगाना पड़ रहा है। एक-दूसरे से सटे खड़े मरीज अपना नंबर आने का इंतजार कर रहे हैं।
ये मरीज सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब डेंगू के फेर में कोरोना एक बार फिर से अपने पैर पसार ले।
जिला अस्पताल में दोपहर 12 बजे पर्चा बनवाने वाले मरीजों की लाइन लगी हुई थी। शुक्रवार को 1110 मरीजों ने पर्चे बनवाए। दस दिन के अंदर अस्पताल में 9627 मरीज आ रहे हैं।
पैथालॉजी के बाहर भी मरीजों की लाइन लगी थी। वरिष्ठ लैब सहायक एके दुबे ने बताया रोजाना करीब 300 लोग जांच कराने आ रहे हैं। करीब एक सैकड़ा लोगों की डेंगू और मलेरिया की जांच होती है।
सुबह जांच कराने वाले मरीजों की रिपोर्ट दोपहर दो बजे के बाद मिल जाती हैं, जो लोग बाहर से आते हैं या देर से आते हैं उन्हें अगले दिन रिपोर्ट मिलती है।
ऐसे में मरीज यहां इंतजार करते रहते हैं। एक जगह पर इतने बीमार लोगों के जमा होने व कोरोना से बचाव के नियमों का पालन नहीं होने से एक बार फिर से जिले में कोरोना का खतरा मंडरा रहा है। वहीं जिम्मेदार अपनी आंखें फेरे हुए हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी
सीएमएस डा.एमएम आर्या के अनुसार जिला अस्पताल भी विशेषज्ञ व अन्य डाक्टरों की समस्या से जूझ रहा है। कुछ डाक्टर सेवानिवृत्त हो चुके हैं कुछ का स्थानांतरण अन्य जनपदों के लिए हो गया है। नए चिकित्सक मिले नहीं हैं। शासन को इस बारे में कई बार लिखा भी जा चुका है। दवाइयों के स्टाक के बारे में बताया अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं।
एडीज मच्छर के काटने से होता है डेंगू
होम्योपैथिक चिकित्सक डा.आशीष दीक्षित का कहना है डेंगू एक संचारी रोग है, जो महामारी के रूप में अक्सर बरसात के मौसम में होता रहता है। यह रोग भी मच्छर के काटने से ही होता है, एडीज नामक मच्छर के अक्सर दिन में काटने से यह रोग होता है।
डेंगू के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी, जी मिचलाना, बदन का तेजी से टूटना, शरीर पर लाल रंग के चक्कते खुजली, पेशाब में तेज जलन, आंखों के पिछले हिस्से में तेज दर्द, मुंह का स्वाद खराब होना, गले में तेज दर्द होना मुख्य हैं।
डेंगू का प्रकोप अधिक होने पर मुंह से खून की उल्टी तक हो जाती है। लक्षणों की पुष्टि या जांच में डेंगू की पुष्टि होने पर तुरंत ही उपचार आवश्यक है।
डेंगू के बचाव या रोकथाम ही डेंगू का सर्वश्रेष्ठ इलाज है, इसके लिए कूलर में भरे पानी को हटा दें, आसपास गड्ढे में भरे पानी को मिट्टी से बंद कर दें, बोतलों, टायरों में भरे पानी को साफ करें, घरों में कलेंडर तस्वीरों के पीछे साफ सफाई रखें।
रुके हुए पानी को साफ रखें या उनमें पेट्रोल या मिट्टी का तेल डाल दें, अत्यधिक ठंडे पानी का सेवन न करें, मच्छरों को मारने वाली क्रीम कोइल का इस्तेमाल करें, ध्यान रहे डेंगू का मच्छर दिन में अधिक प्रभावी रहता है।
बच्चों को स्कूल जाने पर उनको फुल शर्ट पहनाएं और फ्रिज के नीचे वाली ट्रे को रोज साफ रखें। डा. आशीष दीक्षित ने कहा होम्योपैथी में डेंगू का बेहतरीन इलाज उपलब्ध है। बैप्टिसिया 30, यूपीटोरियाएम पर्प 200, रस टॉक्स 200, इंफ्लुएंजिन 200 कुछ ऐसी दवाएं हैं जिनसे जड़ से रोग से निजात संभव है।
सीएचसी पर रोजाना आते हैं 300 मरीज
जसवंतनगर संवाद के अनुसार सीएससी जसवंतनगर पर रोजाना करीब 300 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। ज्यादातर मरीज वायरल फीवर के बताए जाते हैं। मरीजों के लिए डेंगू वार्ड तथा मलेरिया वार्ड बनाया गया है।
यहां सभी प्रकार की जांच की जा रही है। सीएचसी प्रभारी डा. सुशील कुमार यादव ने बताया कि मरीजों को कोरोना से बचाव के लिए भी जागरुक किया जा रहा है। इसके बाद भी वह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं।
एक्स-रे मशीन होने के बावजूद नहीं मिल रहा लाभ
चकरनगर संवाद के अनुसार सीएचसी राजपुर में तीमारदार रुई से लेकर सुई तक के लिए भी तरस रहे हैं। आलम ये है कि यहां तीन वर्ष से एक्स-रे मशीन होने के बावजूद मरीजों को एक्सरे के लिए भटकना पड़ रहा है।
बीहड़ी क्षेत्र का इकलौता अस्पताल होने के बावजूद भी दोपहर 2 बजे के बाद अस्पताल का स्टाफ आयुष फार्मासिस्ट के सारे छोड़कर जिला मुख्यालय के लिए रवाना हो जाता है।
अस्पताल आए हरिकिशन तिवारी ने बताया अस्पताल 5 बार आए, लेकिन डॉक्टर एक भी बार नहीं मिले। अस्पताल में अनदेखी के चलते तीमारदारों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।
मात्र एक चिकित्सक हैं और वह भी 11 बजे आते हैं और दोपहर 01 बजे दो घंटे के अंदर मरीजों को रंग बिरंगी गोलियां देकर लौट जाते हैं। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अवधेश कुमार यादव ने बताया अस्पताल में ओपीडी रोजाना चल रही है।
बात एक्सरे मशीन की है तो फिल्म व डेवलपर न होने की वजह से मशीन बंद पड़ी है। इस बारे में उच्चाधिकारियों को बार-बार लिखा जा रहा है, लेकिन अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है
चिकित्सकों की कमी से जूझ रही सीएचसी
महेवा संवाद के अनुसार बदलते मौसम में बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इस वजह से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में रोजाना वृद्धि हो रही है। सीएचसी में चिकित्सकों कमी के चलते मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।
दो चिकित्सको के सहारे अस्पताल संचालित है। केंद्र अधीक्षक डॉ. गौरव त्रिपाठी वैक्सीन व अन्य कार्यों में व्यस्त रहते हैं, जबकि डा. अभिषेक ही मरीजों को देखते हैं।
बताया सीएचसी पर रोजाना 150 से 180 मरीज आ रहे हैं। वायरल फीवर, सर्दी, जुकाम-खांसी के आ रहे हैं। अस्पताल में मलेरिया, डेंगू, टीबी आदि की जांच हो रही है।