इटावा। अपना जिला भले ही छोटा है और यहां कोई बड़ा उद्योग नहीं है लेकिन कोरोना वायरस को लेकर बहुत ही संवेदनशीन है। जिले के सैकड़ों लोगों का रोज पहले ही लॉकडाउन हो चुके आगरा, लखनऊ, कानपुर और ग्वालियर आना जाना होता है। इन शहरों में कोरोना के पाजिटिव मरीज मिल चुके हैं। इटावा जिले से राजधानी लखनऊ 220, कानपुर 160, आगरा 120 और ग्वालियर 105 किलोमीटर दूर है।
भरथना, बकेवर, महेवा क्षेत्र के ज्यादातर लोग मुख्य खरीदारी करने कानपुर शहर आते जाते रहते हैं। इन क्षेत्रों के ज्यादातर व्यापारी कानपुर के थोक बाजार से ही सामान लाते हैं। क्षेत्र के ज्यादातर लोगों की रिश्तेदार भी कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव में हैं। वहां भी आना जाना रहता है। इसी तरह चकनरगर, बड़पुरा क्षेत्र के संपन्न लोगों ने तो ग्वालियर में ही आवास बना रखे हैं। इस क्षेत्र के व्यापारी ग्वालियर व भिंड के सामान लाते हैं।
जसवंतनगर और सैफई क्षेत्र के लोगों के लिए आगरा का बाजार सुगम है। इस क्षेत्र के प्रतिदिन चार से पांच हजार लोग आगरा आते जाते हैं। एक्सप्रेसवे बनने के बाद राजधानी लखनऊ बहुत करीब हो गई है। सैफई क्षेत्र के ज्यादातर संपन्न लोगों के घर लखनऊ में ही बन गए हैं। राजनीति और ठेकेदारी से जुड़े सैकड़ों लोग सुबह लखनऊ जाते हैं और शाम को लौट आते हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली आदि में नौकरी करने वाले बहुत से लोग घरों को लौटे हैं। कुछ लोग विदेशों से भी आए हैं। लखनऊ, कानपुर, आगरा, ग्वालियर, अन्य राज्यों के महानगरों व विदेश से लौटे हजारों लोग जिल में होने से कोराना यहां कहर बरपा सकता है। ये जानते हुए लोग लापरवाही बरत रहे हैं। मंगलवार को भी बेवजह बिना मास्क के शहरों पर घूमे और भीड़ का हिस्सा बनें। ये लापरवाही भारी पड़ सकती है। सतर्कता बरतें, खुद को परिवार के साथ घरों में बंद कर लें।