इकदिल में चल रहे श्री 1008 मज्जिनेंद्र जिनबिंब
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा विश्व शांति महायज्ञ एवं गजरथ महोत्सव का वेदी
प्रतिष्ठा एवं गजरथ के साथ समापन हो गया। इसमें भगवान पार्श्वनाथ सहित 17
तीर्थंकरों की मूर्तियों को विराजमान किया गया।
कार्यक्रम की
शुरुआत आचार्य श्री 108 विवेक सागर जी महाराज ने श्रीजी के ऊपर जलाभिषेक के
साथ कराई। नित्य पूजन एवं शांति धारा के बाद गजरथ महोत्सव प्रारंभ हुआ,
जिसमें मुख्य कलश लेने का सौभाग्य भिंड से आए दिलीप जैन को प्राप्त हुआ।
जबकि पारसनाथ कलश का सौभाग्य इकदिल के संजय जैन को प्राप्त हुआ।
गजरथ
महोत्सव में गाजे-बाजे के साथ श्रीजी को लेकर सौधर्म इंद्र श्रवण कुमार,
कुवेर इंद्र शैलेश जैन, ईशान इंद्र सुभाष जैन भरथना हाथी पर बैठे थे। जब कि
यज्ञनायक, सनत्कुमार, माहेंद्र इन्द्र, ब्रह्रा इंद्र, ब्रहोत्तर इंद्र,
लांतव इंद्र, कापिष्ठ इंद्र, शुक्र इंद्र, महाशुक्र इंद्र, शतार इंद्र
श्रीजी को लेकर नव निर्मित मंदिर तक पहुंचे। जहां आचार्य श्री ने वेदी
शुद्धता के बाद भगवान पारसनाथ, महावीर स्वामी सहित 17 तीर्थंकरों को
विराजमान कराया।
सायं कालीन छह बजे गुरु भक्ति एवं आनंद यात्रा का
कार्यक्रम हुआ। अंत में समस्त पुजारियों, समिति पदाधिकारियों को आचार्य
श्री द्वारा सम्मानित एवं आशीर्वाद दिया गया। सायं 8 बजे अखिल भारतीय कवि
सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसका शुभारंभ सदर विधायक रघुराज सिंह शाक्य ने भगवान
महावीर स्वामी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इसमें
अलवर राजस्थान के डॉ. कमलेश कुमार, कैलाश चंद्र, टीकमगढ़ के अनिल मिश्रा,
जयपुर से आए अशोक कुमार, जनार्दन शुक्ला सहित भोपाल के चंद्रसेन जैन ने
कविता पाठ किया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि रघुराज सिंह शाक्य सहित सभी
वाणीपुत्रों का समिति अध्यक्ष संजू जैन, शैलेश जैन सहित समिति पदाधिकारियों
ने प्रतीक चिह्न व शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
संचालन चंद्रसेन जैन
भोपाल ने किया। अंत में अध्यक्ष संजू जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में राजकुमार जैन, पोपे जैन, दीपू जैन, शैलेश जैन, कमल जैन,
चिंटू जैन आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।