पंचायत चुनाव ने बेसिक शिक्षकों की मनमाफिक तैनाती की
मंशा पर पानी फेर दिया। तमाम कवायदों के बाद शासन ने शुक्रवार को ट्रांसफर
प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
सरकार के इस कदम से टीचर मायूस हैं।
जिले में एक हजार से अधिक टीचरों ने ट्रांसफर के लिए आवेदन किया है।
ट्रांसफर प्रक्रिया 19 सितंबर तक पूरी की जानी थी, लेकिन एक दिन पूर्व इस
पर रोक लग गई।
प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों के टीचरों को यह
सहूलियत दी थी कि वे जिले के अंदर एक ब्लाक से दूसरे में स्थानांतरण का लाभ
ले सकते हैं। शासन के इस निर्णय से शिक्षकों को चेहरे खिल गए थे। इच्छुक
अध्यापकों ने बीआरसी में आवेदन भी कर दिए थे।
मनचाही तैनाती पाने
के लिए टीचरों ने सत्तापक्ष के नेताओं का भी सहारा लिया। कई सपा नेताओं ने
टीचरों की सिफारिश भी की थी। इन दिनों आवेदनों की सूची बीआरसी से बीएसए
कार्यालय भेजी जा रही थी। शुक्रवार को अचानक शासन से स्थानांतरण प्रक्रिया
पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए गए।
बेसिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद
के सचिव संजय सिन्हा ने शुक्रवार को मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक एवं बीएसए
को भेजे अति महत्वपूर्ण पत्र में कहा कि शासन से निर्धारित नीति 2015 के
अनुसार जिले के भीतर अध्यापकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया 19 सितंबर तक
संपादित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
यह प्रक्रिया पंचायत
चुनाव आदि अपरिहार्य कारणों के चलते तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दी गई है।
यह स्थगन अग्रिम आदेशों तक जारी रहेगा।
जिले के अंदर तबादले का
अवसर मिलने पर टीचरों ने हर ब्लाक से आवेदन किए। सबसे अधिक 225 आवेदन
चकरनगर बीआरसी में आए हैं। मालूम हो कि चकरनगर ब्लाक बीहड़ी क्षेत्र में
आता है। इस ब्लाक में टीचर रहना नहीं चाहते।
इस ब्लाक क्षेत्र के
स्कूलों में टीचरों की उपस्थिति काफी कम रहती है। इस सहूलियत को टीचरों ने
अवसर की तरह लिया, लेकिन उनकी मंशा फिलहाल नहीं हो सकी है। इसी तरह महेवा
ब्लाक से 205, ताखा से 190 और सैफई से 113 अध्यापकों ने तबादले के लिए
आवेदन किए हैं। जिले भर में यह संख्या एक हजार से अधिक रही है।
लेटलतीफी की शिकार रही प्रक्रिया
बेशक
शासन ने स्थानांतरण प्रक्रिया पर रोक लगा दी है, लेकिन जिले में यह
प्रक्रिया पहले से लेटलतीफी का शिकार रही है। इस प्रक्रिया को 19 सितंबर तक
पूरा किए जाने के निर्देश शासन ने दे रखे थे, लेकिन अभी तक सभी ब्लाकों से
आवेदनों की सूची भी बीएसए कार्यालय को नहीं मिली थी। इस कार्य से जुडे़
बाबू की कार्यशैली को इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
शासन से
रोक लगने पर स्थानांतरण प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। जब
शासन से दोबारा आदेश मिलेंगे, तभी इस प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा।
जेपी राजपूत, बीएसए, इटावा।