घने कोहरे ने रेल तथा सड़क यातायात को प्रभावित कर दिया है। कोहरे के कारण दिल्ली-हावड़ा ट्रैक पर शुक्रवार को ट्रेनों का संचालन लड़खड़ा गया। दिल्ली की ओर जाने वाली गाड़ियां 11 घंटे तक देर से इटावा आईं।
गाड़ी आने के इंतजार में में बैठे लोग प्लेट फार्म पर ठिठुरते रहे। कई यात्रियों ने अपना रिजर्वेशन कैंसल कराकर यात्रा टाल दी। पूछताछ खिड़की पर भीड़ लगी रही। वहीं कोहरे के कारण सड़क यातायात भी बुरी तरह से प्रभावित रहा।
गुरुवार की रात 8 बजे से ही कोहरे की चादर तनने लगी। रात दस बजे सड़क पर पांच फीट की दूरी पर भी दिखाई नहीं दे रहा था। कोहरे का असर रेल यातायात पर अधिक रहा।
दिल्ली की ओर जाने वाली मगध एक्सप्रेस 8 घंटे, गोमती एक्सप्रेस 5, तूफान 6, महानंदा एक्सप्रेस 7, कानपुर-आगरा पैसेंजर 3, पूर्वा एक्सप्रेस 11, अवध एक्सप्रेस 8, फरक्का एक्सप्रेस 7 घंटे देर से चली। वहीं कानपुर की ओर जाने वाली नॉर्थ ईस्ट 2, महानंदा 1, कालका एक्सप्रेस 1, नीलांचल 2, शताब्दी 2, मुरी एक्सप्रेस 4 घंटे की देरी से चलीं।
रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि कोहरे के कारण सिग्नल दिखाई नहीं दिए इससे ट्रेनों की रफ्तार प्रभावित हुई। इस बीच यात्रियों को गाड़ियों के आने का इंतजार करने के लिए सर्द हवाओं के बीच प्लेटफार्मो पर डेरा जमाना पड़ा। रिजर्वेशन काउंटर पर टिकट कैंसल कराने के लिए भीड़ लगी रही।
उधर, कोहरे का सड़क यातायात पर भी प्रभाव पड़ा। तड़के तीन से सुबह आठ बजे के बीच कोहरा इतना घना था कि हाईवे पर वाहनों की हेड लाइटें जुगनू की तरह टिमटिमाती नजर आ रही थीं। आम तौर पर बसें और ट्रक 60 से 70 की स्पीड से चलते हैं, लेकिन कोहरे के कारण वाहन 40 से भी कम की स्पीड से रेंगते नजर आए।
कई चालकों ने तो रात 12 बजे के बाद ही अपने वाहन ढाबा या पेट्रोल पंप पर खड़े कर दिए थे। सुबह करीब 9 बजे कोहरा छंटा तो सड़कें गुलजार हुईं। हाइवे पर बाइक सवार सुन्न हो चुकीं उंगलियां को गर्म करने के लिए अलाव तापते दिखे।
और गिरा तापमान नहीं निकली धूप
गलन भरी सर्दी से शुक्रवार को लोग हलाकान रहे। घने कोहरे से सुबह की शुरुआत हुई। आसमान में दिनभर बादल छाए रहे। तापमान 7.5 डिग्री से गिरकर 6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वातावरण में 98 प्रतिशत नमी रही। शाम होते ही कोहरे का प्रकोप फिर शुरू हो गया। लोग दिनभर धूप निकलने का इंतजार करते रहे