जसवंतनगर। रेहड़ी पटरी वालों के लिए सरकार ने ऋण योजनाओं को काफी जटिल बना दिया है। इस जटिलता के कारण योजनाआें का लाभ पात्रों तक नहीं पहुंच पा रहा है। यह कहना है पथ विक्रेताओं के राष्ट्रीय संगठन नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स नासवी के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इरशाद अहमद का।
उन्होंने कहा कि अभी सरकार ने रेहड़ी पटरी वालों को 10 हजार तक का ऋण देने की योजना संचालित की है। यह राशि पर्याप्त नहीं है। सरकार को कम से कम 25 हजार रुपये देना चाहिए। इस बारे में जनप्रतिनिधियों को भी आवाज उठानी चाहिए। कहा कि ऑनलाइन आवेदन, सर्वे, पहचान पत्र, बैंक पासबुक, आधार कार्ड, आधार लिंक, जैसी जटिलताओं के कारण 90 प्रतिशत रेहड़ी पटरी वाले योजना का लाभ नहीं उठा सके। योजना सरल बनाने के लिए सरकार ने कोई उपाय नहीं किया। वैश्विक महामारी कोराना लॉकडाउन के समय जान जोखिम में डालकर सेवा प्रदान करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स आज भी खाली हाथ हैं।
उन्होंने कहा कि संपूर्ण देश में राष्ट्रीय पथ विक्रेता अधिनियम 2014 से लागू है। इसमें साप्ताहिक बाजारों की निरंतरता, उच्चीकरण के प्राभधान होने के बावजूद भी विगत 4 महीनों से बाजार बंद हैं। इस कारण बाजारों में पटरी पर दुकान लगाकर जीविका चलाने वाले लाखों लोग रोजगार से वंचित हैं। उनके सामने पेट भरने की समस्या एवं साहूकारों के कर्ज चुकाने की चिंता है।
इस कारण बहुत से पथ विक्रेता असमय दुनिया छोड़ कर चले गए। बहुत से भोजन दवाइओं के अभाव के चलते गंभीर बीमारियों के शिकार हो गए हैं। सरकार के पास इनकी सहानुभूति के लिए दो शब्द भी नहीं है। और न ही बाजार लगवाने की कोई योजना।