फोटो 38:: अस्पताल में पुलिस को जानकारी देतीं सीता देवी। स्रोत परिजन
बकेवर। 50 शैया अस्पताल की इमरजेंसी में शनिवार रात बीमार युवती के उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजन ने हंगामा किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि इमरजेंसी में पहुंचने के बाद डेढ़ घंटे तक डॉक्टर का दरवाजा खटखटाते रहे, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। पुलिस के पहुंचने के बाद कमरे से डॉक्टर बाहर आए। परिजन ने डॉक्टर पर उपचार किए बिना ही युवती को आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय रेफर करने का भी आरोप लगाया।
आदर्श नगर निवासी राखी की मां सीता देवी ने बताया कि शनिवार रात करीब 10 बजे अचानक राखी की हालत बिगड़ गई। वह उसे लेकर 50 बेड के अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचीं। वहां नर्स और एक सफाई कर्मचारी मौजूद थे। परिजनों ने डॉक्टर को बुलाकर युवती का उपचार कराने के लिए कहा। आरोप है कि उन्हें बताया गया कि ईएमओ मौके पर मौजूद नहीं हैं। काफी देर तक उपचार शुरू नहीं होने पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस के पहुंचने पर ओपीडी की ओर स्थित एक कमरे में लाइट जलती मिली। कमरे का दरवाजा खटखटाने पर अंदर डॉक्टर के मौजूद होने की जानकारी हुई। परिजन का आरोप है कि दरवाजा खटखटाने के करीब डेढ़ घंटे बाद डॉक्टर कमरे से बाहर आए। डॉक्टर ने राखी को समुचित उपचार दिए बिना ही आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के लिए रेफर लेटर बना दिया। इसको लेकर परिजन ने इमरजेंसी की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए हंगामा किया।
उनका कहना है कि इमरजेंसी में ईएमओ की ड्यूटी के बजाय ओपीडी में तैनात एनेस्थीसिया के डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई थी। परिजन ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप गुलाटी ने बताया कि रात में इमरजेंसी में डॉ. अजय मौर्य की ड्यूटी थी। परिजन की ओर से अभी कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।