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गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति पसंद करतीं महिला

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इटावा। धनतेरस पर खरीदारी करने के बाद लोगों ने शनिवार को दिवाली पूजन के लिए गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियाें के अलावा खील, गट़्टा, शक्कर के खिलौने और बताशा की खरीदारी की। सीओ चौराहा के नजदीक तथा पुल कहारान पर मूर्तियों की दुकानें लगीं हैं। खरीदार दोनों स्थानों पर मूर्तियों को पसंद करने के बाद खरीदने में लगे रहे। इनके अलावा लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू, गणेश जी का वाहन चूहा भी बिक रहा है। कुबेर जी, हनुमान जी, दुर्गा जी, सरस्वती जी की मूर्तियां भी आकर्षण का केंद्र हैं। लोग इन्हें भी खरीदकर ले जा रहे हैं। रंगोली के लिए डिजाइनिंग दीए खरीदे गए।
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धनतेरस पर बाजारों में धनवर्षा होने के बाद शनिवार को बाजार खरीदारों से गुलजार रहे। धनतेरस की खरीदारी करने के बाद लोगों ने पूजन के लिए गणेश- लक्ष्मी की मूर्तियां, खील, गट्टा, शक्कर के बने खिलोने, गट्टा, बताशा खरीदने में लगे रहे। मूर्तियों वस्त्र एवं शृंगार के अलावा घरों के दरवाजों की शोभा और साज सज्जा बढ़ाने के लिए तोरण और आर्टिफिशियल फूलों की मालाएं खरीदीं। रेडीमेड चरण पादुका और रंगोली भी लोगों ने खरीदा। दोपहर बाद बाजार में भीड़ नजर आने से जाम में भी लगता रहा।
शनिवार को नरक चतुर्दशी के मौके पर शाम को घरों से बाहर दरवाजे पर दक्षिण दिशा की ओर यमराज के नाम पर चौमुखी दीपक जलाकर रखा गया। ऐसा माना जाता है कि यमराज तो खुश होते ही हैं साथ ही अकाल मृत्यु से भी बचा जा सकता है। एक कथा के अनुसार इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने असुर नरकासुर का वध करके सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के कब्जे से मुक्त कराया था।
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मूर्तियों के विक्रेता धर्मेद्र ने बताया कि पहली बार चेन्नई व कोलकाता से भी मूर्तियां मंगवाई हैं। 15 इंच की मूर्तियां लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं। जो 10 हजार से कम नहीं हैं। एक अन्य विक्रे ता विशाल ने बताया उसने पहली बार आगरा से एंटिक मूर्तियां मंगवाई हैं। ये दो सौ से लेकर छह सौ रुपये तक की हैं।
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