फोटो 02:: कलक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक करते डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल। स्रोत-सूचना विभाग
दर्पण पोर्टल पर विकास कार्यों की रैंकिंग फिसली, अप्रैल में 25वें स्थान से गिरकर मई में 37वें पर
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड (दर्पण पोर्टल) पर विकास कार्यों से जुड़ी रैंकिंग फिसल गई है। अप्रैल 2026 में 25वें स्थान पर रहने वाला जिला मई में 37वें स्थान पर पहुंच गया। बुनियादी सुविधाओं में सबसे ज्यादा जरूरी मार्ग व्यवस्था सबसे ज्यादा बदहाल मिली। सड़कों के निर्माण में जिले को 10 में से महज चार अंक मिले। समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आने पर डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यह अब बर्दाश्त से बाहर है। जिन योजनाओं में प्रदर्शन कमजोर है, उनमें तत्काल सुधार लाया जाए।
कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में विकास कार्यों की रैंकिंग में आई गिरावट ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय सोलर स्ट्रीट लाइट योजना, ड्रॉप मोर क्रॉप, ट्रांसफार्मर शिकायत निस्तारण, कृषि रक्षा रसायन डीबीटी, एंबुलेंस-102, टेली रेडियोलॉजी, दिव्यांग पेंशन और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जिला प्रदेश में पहले स्थान पर है। इसके बावजूद कई प्रमुख योजनाओं में जिले की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
सबसे दिलचस्प स्थिति मुख्यमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में देखने को मिली। दोनों योजनाओं में जिले को 10 में 10 अंक मिले, लेकिन रैंक क्रमशः 65 और 64 रही। नई सड़कों के निर्माण में जिले को केवल चार अंक मिले और रैंक 64 रही, जो आधारभूत ढांचे के मोर्चे पर कमजोर प्रदर्शन की ओर इशारा करती है।
परिवार आईडी, 15वें वित्त आयोग और सामाजिक वानिकीकरण जैसे क्षेत्रों में भी अपेक्षित प्रगति नहीं दिखी। बैठक में डीएम ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री का जनपद भ्रमण किसी भी समय हो सकता है। ऐसे में अधूरी परियोजनाओं को जल्द पूरा किया जाए और नई परियोजनाओं के प्रस्ताव भी तैयार रखे जाएं।
उन्होंने लोक निर्माण विभाग को आबादी वाले क्षेत्रों में सड़कों के किनारे नालियां बनवाने और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की समीक्षा में अभी 10 दिन शेष हैं। यह समय रैंकिंग सुधारने का अवसर है। जिन विभागों के कारण जिले की रैंकिंग प्रभावित हुई है, उन्हें परिणाम दिखाने होंगे।
उन्होंने अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि किसी भी इंडिकेटर पर लापरवाही जिले की छवि पर असर डाल सकती है। सीडीओ अजय कुमार गौतम, उप निदेशक कृषि सतीश कुमार पांडेय, डीआईओएस अतुल सिंह, सीवीओ डॉ. धर्मेंद्र सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी विनय कुमार रहे।