जिले के विकलांग पेंशन को लेकर परेशान हैं। परेशान पेंशनर विकलांग कल्याण दफ्तर और बैंक के चक्कर काटने को मजबूर हैं। यहां उन्हें यह कहकर टरका दिया जाता है कि उनकी पेंशन ऊपर से ही नहीं भेजी जा रही है। कुछ पेंशनरों की पिछली वित्तीय वर्ष और कुछ की इस वित्तीय वर्ष की पेंशन की किस्ते अभी तक खाते में नहीं पहुंची।
शासन ने पेंशन आदि अन्य योजनाओं में रकम का भुगतान पीएफएमएस के जरिए शुरू किया है, जिससे पेंशन राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंच जाती है। इस सिस्टम की तकनीक गरीब पेंशनरों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहीं हैं। जब तक पीएफएमएस लाभार्थी के बैंक खाते को ओके नहीं करता, तब तक धनराशि लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर नहीं होती है।
इसी तकनीक की वजह से सभी विकलांग पेंशनरों को पेंशन की रकम नहीं मिल पा रही। जिले में कुल 10092 विकलांगों को 300 रुपये प्रतिमाह की पेंशन दी जा रही है। पहले यह पेंशन हर साल दो छमाही किस्तों में उपलब्ध होती थी, बाद में इसे चार किस्तों में भेजा जाने लगा। पिछले वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही किस्त (अक्तूबर 2014 से मार्च 2015) का भुगतान हो चुका है।
जिसमें 10092 पेंशनरों में से 8837 के बैंक खाते में ही पेंशन पहुंची। 1255 विकलांग पेंशन से वंचित हो गए। इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) तक की 900 रुपये की किस्त का भुगतान हो चुका है, लेकिन इस बार भी 8542 विकलांगों की ही पेंशन खाते में पहुंची। 1550 विकलांग इस बार भी पेंशन राशि पाने से वंचित रह गए। इस तरह पिछली दो किस्तों में 2805 विकलांगों को पेंशन नहीं मिल पाई।