उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (रिम्स) के मेडिसिन विभाग में नई हीमोडायलिसिस विंग का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डा. ब्रिगेडियर टी प्रभाकर ने किया।
उन्होंने कहा कि इससे एक साथ 20 मरीजों की डायलिसिस की जा सकती है। डायलिसिस एक महंगी चिकित्सा है जबकि संस्थान में यह नाममात्र के शुल्क पर उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि एक साथ 20 मशीनों के लगने से आसपास के लोगों को अब कानपुर, आगरा अन्य बड़े शहरों में नहीें जाना पड़ेगा।
मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. पीएस सिंह ने बताया कि संस्थान में डायलिसिस के लिए उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश एवं राजस्थान से भी मरीज आते हैं।
संस्थान में डायलिसिस काफी कम फीस पर पर उपलब्ध है जबकि नर्सिंगहोम एवं अन्य प्राइवेट अस्पतालों में एक बार डायलिसिस की फीस 8 से 10 हजार के बीच आती है। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों की किडनी खराब है, जिनकी किडनी रक्त साफ करने में सक्षम नहीं हैं, उनकी किडनी तुरंत बदलना संभव नहीं है, उन्हें डायलिसिस की आवश्यकता होती है।
उन्होंने बताया कि डायलिसिस प्रक्रिया में आमतौर पर चार से पांच घंटे का समय लगता है जिसमें शरीर के रक्त को साफ कर दिया जाता है जिससे मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। इस मौके पर कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक डा आदेश कुमार, डा. केएस जफर. तेजभान, बद्री राम, प्रमोद कुमार, स्टाफ नर्स हेमंत त्यागी आदि उपस्थित रहे।