इटावा। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर मंगलवार सुबह हुआ हादसा डीएफओ और उनके चालक के लिए काल बन गया। जांच करने पहुंचे अधिकारियों के अनुसार, डिवाइडर पार करके अचानक सामने आई दंपती की कार से टकराकर डीएफओ की कार हवा में उछल गई। लगभग 10 फीट कार उछलने के बाद नीचे गिरी। इससे कार पूरी क्षतिग्रस्त होने के साथ ही डीएफओ और चालक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उधर, दंपती की कार टक्कर खाने के बाद दो पलटे खाकर सीधी खड़ी हो गई। इससे उनकी जान बच गई।
एसएसपी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि कि फिरोजाबाद की टीम मामले की जांच कर रही है। टीम के अधिकारियों से बात करने पर पता चला है कि हादसा बहुत ही दर्दनाक था। बताया कि डीएफओ की कार नई थी। कार उनका चालक चला रहा था, लेकिन अचानक कार सामने आने की वजह से उससे टकराकर उछल गई थी। उनकी कार के एयरबैग भी खुल गए थे, लेकिन कार ऊंचाई से गिरने की वजह से डीएफओ और उनके चालक की जान मौके पर ही चली गई। बताया कि फिरोजाबाद की एक विशेष टीम इस मामले की जांच भी करेगी। बताया कि एक विशेष तकनीकी टीम गठित करने की जानकारी मिली है। इसमें पुलिस-परिवहन के साथ एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी रहेंगे।
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राजस्थान के नागौर जिले के मूल निवासी, जयपुर में रहता था परिवार
सफारी के निदेशक डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि डीएफओ 2019 बैच के आईएफएस थे। उन्होंने 19 जून 2025 को डीएफओ के रूप में जिले का प्रभार लिया था। बताया कि वह मूल रूप से राजस्थान के नागौर जिले के मूल निवासी थे। कुछ सालों से उनकी पत्नी जयपुर में रह रही थी। बताया कि उनकी पत्नी गृहिणी हैं। डीएफओ दो बेटियों के पिता हैं।
घाटमपुर के रहने वाले थे चालक देवांश
देवांश मूलरूप से कानपुर के घाटमपुर का था। वह रघुनाथपुर, पतारा में किराए के मकान में रहकर था। एक ट्रैवल एजेंसी में काम करता था। वह कानपुर में तैनात वन रेंजर की मां केशवती को लेकर गाजियाबाद जा रहा था। देवांश के परिवार में पत्नी आयुषी और एक ढाई साल की मासूम बेटी है।
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मौत ने एक्सयूवी कार में कराया था सवार...पीछे चल रही थी सरकारी गाड़ी
इटावा। डीएफओ आगरा जाने के लिए निकल रहे थे। इस दौरान उन्हें जानकारी मिली थी कि उनकी कानपुर में वन रेंजर के पद पर तैनात दोस्त उपासना की मां श्राद्ध में शामिल होने के लिए गाजियाबाद जा रही थीं। इस पर डीएफओ ने उपासना की मां केशवती (64) को एक कप चाय पीकर साथ चलने के लिए कहा था। सरकारी आवास पर चाय पीने के बाद डीएफओ केशवती की ट्रैवल एजेंसी से की गई निजी कार में सवार हो गए थे। जबकि उनकी सरकारी कार पीछे चल रही थी। उन्होंने आगरा के बाद अपने काम से निकल जाने की बात कही थी। उपासना को मां को निजी ट्रैवल्स की कार करके गाजियाबाद के लिए रवाना किया था। हादसे के बाद अब जब यही कह रहे हैं कि एक्सयूवी कार डीएफओ के लिए मौत बनकर आई थी।
झील, जंगल और वन्यजीवों के लिए समर्पित रहा विकास नायक का कार्यकाल
इटावा। डीएफओ विकास नायक वन्यजीव संरक्षण, पौधारोपण और सरसईनावर झील के विकास को लेकर कई काम किए। मंगलवार को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुए सड़क हादसे में उनकी मौत की खबर से वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी स्तब्ध रह गए। विकास नायक का जन्म 11 नवंबर 1990 को राजस्थान के नागौर जिले में हुआ था। शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रहे विकास ने बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2019 में भारतीय वन सेवा में चयन हासिल किया थे। जून 2025 में उनका स्थानांतरण फिरोजाबाद से इटावा हुआ था। इटावा में तैनाती के दौरान उन्होंने विभागीय योजनाओं के साथ वन्यजीव संरक्षण को लेकर भी सक्रियता दिखाई। सारस संरक्षण और सरसईनावर झील के विकास की दिशा में उनके प्रयासों का वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी उल्लेख किया। इटावा सफारी पार्क के आसपास वन भूमि के संरक्षण और पौधारोपण अभियानों में भी वह सक्रिय रहे। इटावा सफारी पार्क के पास वन विभाग की संरक्षित भूमि में बनी एक मजार का मामला भी उनके कार्यकाल में सामने आया था। यह प्रकरण वन अदालत तक पहुंचा। मामले में साक्ष्य प्रस्तुत नहीं होने के बाद विकास नायक ने मजार के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। इसके बाद वन विभाग ने मजार को ध्वस्त कराया था। इस कार्रवाई के बाद वह जिले में चर्चा में आए थे। संवाद
फोटो 41:: आयुर्विज्ञान विवि में हादसे की जानकारी लेते डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल। स्रोत पुलिस