रमजानुल मुबारक के पहले जुमा पर मस्जिदें रोजेदारों से फुल हो गईं। मस्जिदों के बाहर रोजेदारों को नमाज अदा करनी पड़ी। जुमे की नमाज से पहले खुतबे में इमामों ने रमजान की अहमियत पर तकरीरें कीं।
उलमा ने कहा कि रमजान बहुत बरकतों वाला महीना है। इसके बाद शाम को सवा सात बजे रोजेदारों ने दुआ के साथ रोजा इफ्तार किया। साबितगंज स्थित मदरसा मंबाउल उलूम मस्जिद में जुमे की नमाज से पहले मौलाना वसीम कासमी ने कहा कि रोजेदार अपनी निगाह और जबान की हिफाजत फरमाए। रोजे की हालत में किसी पर गलत निगाह न डालें।
अपनी नजरें भी नीची कर के चलें। रोजे की हालत में गलत बात न निकालें। रोजा सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है। रोजे की हालत में कोई लड़ने पर आमादा भी तो उससे कह दें कि वह रोजे से हैं। उन्होंने कहा कि अल्लाह रोजेदारों के गुनाह माफ कर देता है इसलिए ज्यादा से ज्यादा अपने गुनाहों की माफी के लिए खुले दिल से तोबा करें।
रोजे के साथ ही नमाज की पाबंदी करें। उन्होंने कहा कि रमजान के दिनों में साहिबे निसाम (मालदार) अपने माल का सही हिसाब लगाकर जकात दें। जकात की रकम गरीब तबकों को पहुंचाने की कोशिश करें।
उन्होंने कहा कि सियासी इफ्तार से रोजेदार बचें। आपस में ज्यादा से ज्यादा लोगों को इफ्तार कराएं। शहर में उर्दू मोहल्ला, कटरा पुर्दल खां, मेवाती टोला, नया शहर, नौरंगाबाद, नई बस्ती, कटरा साहब खां, पचराहा, छपरेटी, दहाड़ी मोहल्ला, रामगंज व साबितगंज आदि मोहल्लों स्थित मस्जिदों में रोजेदारों ने जुमे की नमाज अदा की।
इसके बाद शाम को इफ्तार के लिए मोहल्लों में चहल-पहल रही। अस्र की नमाज पढ़ने के बाद रोजेदारों ने इफ्तार के लिए खरीदारी की। उधर धरवार, कुरसैना, निलोई, कलबारी आदि ग्रामों में भी जुमे की नमाज पढ़ी गई।