फोटो 34: ग्रामीणों को स्वच्छता के बारे में जागरूक करती टीम। स्रोत विभाग
डेंगू दिवस पर विशेष-
-साल दर साल बढ़ते जा रहे डेंगू के मामले, मौत का ग्राफ गिरा
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जिले में डेंगू ने अब अपनी चाल बदल ली है। कभी केवल बरसात के मौसम तक सीमित रहने वाली यह जानलेवा बीमारी अब साल के बारह महीने स्थानीय निवासियों को अपनी चपेट में ले रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि पहले जहां डेंगू हर दो साल के अंतराल पर गंभीर रूप लेता था, वहीं अब महज एक साल के भीतर ही इसका विकराल रूप सामने आने लगा है। मौसमी बीमारी से सालभर की बड़ी चुनौती बन चुके डेंगू के डंक से निपटने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी।
अगर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की बात करें साल दर साल डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं लेकिन मौत के ग्राफ में गिरावट आई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक डेंगू ठहरे हुए पानी में पनपता है। विभाग के अनुसार, यमुना और चंबल नदी के तटीय इलाकों से सटे गांव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र डेंगू व मलेरिया के लिए सबसे संवेदनशील हैं। यहां हर साल लोग डेंगू व मलेरिया की चपेट में आते हैं। इसके लिए यहां के क्षेत्रों को विभाग ने संवेदनशील इलाकों में रखा गया है। इसके अलावा पिछले साल सैफई ब्लॉक के लक्षयवाई और वीरपुर जैसे गांव समय-समय पर डेंगू की चपेट में आकर किशोरी की मौत हो गई थी।
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पिछले साल यहां चलाया गया था अभियान
शहर के सिविल लाइंस, अतरोई, जबरपुरा, घटिया अजमत अली, कोकपुरा और नगला राठौर जैसे रिहायशी इलाकों में मरीजों की संख्या बढ़ने पर नगर पालिका ने फॉगिंग व एंटी-लार्वा अभियान चलाया गया था।
वर्ष वार डेंगू के पाए गए मामले
साल कुल डेंगू के केस
2023 20
2024 27
2025 32
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बरसात के बाद बिगड़ती है स्थिति
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बारिश के बाद अक्तूबर व नवंबर में डेंगू का प्रकोप अधिक शुरू हो जाता है। इसके बाद विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर दवा का छिड़काव समेत लोगों को बचाव के प्रति जागरूक करती हैं। इससे अधिक दीपावली के आसपास डेंगू का डंक सबसे तेज रहता है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग केवल एलाइजा टेस्ट को ही पुष्ट मानता है, जबकि निजी पैथोलॉजी और रैपिड किट टेस्ट पर विश्वास नहीं करता है।
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वर्जन-
उच्चाधिकारियों के आदेश पर समय-समय शहर व गांव में टीम भेजकर लोगों को जागरूक किया जाता है। साथ ही दवा का छिड़काव करवाया जाता है। डेंगू बढ़ने की शुरुआत बारिश के बाद होती है। इसके लिए विभाग पहले से तैयारी रखता है। -डॉ. एसएन सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी।