इटावा/भरथना। यूजीसी के नए नियमों के प्रति सवर्ण समाज के लोगों ने नाराजगी जाहिर की है। शहर में बड़ी संख्या में कलक्ट्रेट पहुंचे लोगों ने एडीएम को ज्ञापन सौंपा है। वहीं, भरथना में अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर नियमों को बदलने का फैसला वापस लेने की मांग की है।
क्षत्रिय स्वाभिमान मंच और अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने नारेबाजी करके यूजीसी के बदलावों के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। लोगों का शोर सुनकर आए एडीएम अभिनव रंजन श्रीवास्तव ने सभी को शांत कराया। इसके बाद क्षत्रिय स्वाभिमान मंच के अध्यक्ष विकास भदौरिया और अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष बंटी बाजपेई के नेतृत्व में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया गया। इसमें नये नियम सवर्ण समाज के खिलाफ बताए गए।
भरथना में अधिवक्ताओं ने दिए ज्ञापन में कहा कि बदलवा के फैसले को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। कहा कि उत्तर प्रदेश सहित देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में लागू किया जा रहा यह नियम देश की सामाजिक व्यवस्था एवं शिक्षा प्रणाली के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। इस विनियम के लागू होने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि यह नियम संविधान में प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इससे छात्रों एवं शिक्षकों में असंतोष फैल सकता है, जिसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि यूजीसी की ओर से लाए गए समानता संवर्धन विनियम 2026 को वापस लिया जाए, ताकि सामाजिक संतुलन और संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रह सकें।
ज्ञापन देने वालों में हरिश्चंद्र पांडेय, आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव, रामपाल राठौर, राघवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, राजकुमार तिवारी, राघवेंद्र सिंह चौहान, राकेश चौहान, रविंद्र सिंह चौहान, सुनील त्रिपाठी, प्रदीप तिवारी, कृष्णकांत श्रीवास्तव, सौरभ शुक्ला मौजूद रहे।