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Etawah News: 300 में खेल और 1200 में वार्षिकोत्सव का फरमान, शिक्षक परेशान

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इटावा। शासन ने परिषदीय विद्यालयों में खेल उत्सव और वार्षिकोत्सव का आयोजन करने का निर्देश दिया है, लेकिन इसके लिए जारी किया गया बजट शिक्षकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। जनपद के 1472 परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत करीब 94 हजार छात्र-छात्राओं के लिए आवंटित फंड अपर्याप्त है। हैरत की बात तो यह है कि टेंट का साधारण किराया ही 1500 रुपये हैं जबकि पूरे वार्षिकोत्सव का बजट 1200 रुपये तय किया गया है।
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बजट की विसंगतियां जिले के 1472 परिषदीय विद्यालयों में वार्षिकोत्सव के लिए प्रति विद्यालय 1200 रुपये के हिसाब से कुल 17,66,400 रुपये आवंटित किए गए हैं। वहीं, दो कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों के लिए 2400 रुपये दिए गए हैं। खेल महोत्सव के लिए परिषदीय स्कूलों को प्रति विद्यालय 300 रुपये और कस्तूरबा विद्यालयों को 600 रुपये मिले हैं। यह आयोजन 31 जनवरी तक पूरा करना अनिवार्य है।



शिक्षकों की चिंता शिक्षकों का कहना है कि 300 रुपये में बच्चों के लिए मेडल, सर्टिफिकेट, चूना और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था संभव नहीं है। एक सामान्य लाउडस्पीकर और माइक का किराया ही 500 से 700 रुपये है, जबकि मंच के लिए टेंट और कुर्सियों का खर्च 1500 रुपये से अधिक हो सकता है। इस बजट में अतिथियों का स्वागत, जलपान और पुरस्कार वितरण जैसी व्यवस्थाएं करना मुश्किल है। ऐसे में, खेल उत्सव और वार्षिकोत्सव केवल खानापूर्ति बनकर रह जाएंगे।
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आयोजन की रूपरेखा राज्य परियोजना निदेशक द्वारा जारी रूपरेखा के अनुसार, खेलकूद महोत्सव के लिए सामग्री और ट्रैक बनाने हेतु प्रति विद्यालय 300 रुपये कम्युनिटी मोबलाइजेशन मद से खर्च होंगे। विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए जाएंगे। वार्षिकोत्सव में विद्यालय की साज-सज्जा, टेंट, कुर्सियां, दरी, पुरस्कार और अभिभावकों के जलपान की व्यवस्था की जाएगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा। सर्वाधिक उपस्थिति वाले बच्चों को भी सम्मानित किया जाएगा। सभी गतिविधियों की फोटो व वीडियोग्राफी भी करवाई जाएगी।



शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में बजट आवंटित कर दिया गया है। शिक्षकों से अपेक्षा है कि वे उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से बच्चों का उत्साहवर्धन करें। शासन के निर्देश के अनुसार सभी कार्यक्रम करवाए जाएंगें।
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डॉ. राजेश कुमार, बीएसए
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