इटावा। जिले में परिवार नियोजन का सुरक्षा कवच लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है। नसबंदी के बाद भी 17 महिलाएं फिर से गर्भवती हो गईं। इसके लिए विभाग को 10.20 लाख रुपये का जुर्माना भी देना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले नौ महीनों के भीतर 1266 महिलाओं ने नसबंदी कराई थी। इनमें से 17 की नसबंदी फेल हो गई।
पहले तो अधिकारियों ने पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और पुख्ता प्रमाणों के आगे स्वास्थ्य महकमे को उनके दावे को मानना मजबूरी बन गई। डॉक्टरों की इस चूक के बदले प्रति केस 60 हजार रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान है। लिहाजा 17 महिलाओं के दावों पर 10.20 लाख का मुआवजा देना होगा। बता दें कि सरकार नसबंदी के लिए पुरुषों को 3000 और महिलाओं को 2000 रुपये (प्रसव के तुरंत बाद 3000) प्रोत्साहन राशि देती है।
लक्ष्य पूरा करने की होड़ में सर्जन और स्वास्थ्यकर्मी गुणवत्ता को ताक पर रख रहे हैं। यही वजह है कि वर्ष 2025 में हजारों महिलाओं ने प्रसव के बाद नसबंदी के बजाय परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों जैसे कॉपर- टी और अंतरा इंजेक्शन को प्राथमिकता
सीएचसी जसवंतनगर के नगला दसी निवासी मीरा (काल्पनिक नाम) ने प्रसव के बाद नसबंदी करवाई थी। छह माह बाद वह फिर से गर्भवती हो गई। उन्हाेंने नसबंदी पर आपत्ति जताकर मुआवजे का दावे किया। जिला क्षति उप समिति ने उनका दावा स्वीकार कर लिया है। अब उन्हें 60 हजार रुपये स्वास्थ्य विभाग को देने पड़ेंगे।
सीएचसी महेवा की रम्पुरा निवासी साधना कुमारी (काल्पनिक नाम) ने नसबंदी कराई थी। उनकी भी नसबंदी फेल हो गई। नसबंदी के बाद दोबारा गर्भवती होने के बाद उनका परिवार परेशान हो उठा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में आपत्ति दर्ज कराई। उनका दवा स्वीकृत हो गया है।
जिले में नसंबदी के बाद 17 केस फेल हुए हैं। उनके दावे स्वीकार कर लिए गए हैं। जल्द ही उनके खाते में 60-60 हजार रुपये के हिसाब से धनराशि भेज दी जाएगी। नसबंदी के बाद बहुत कम केस में फेलियर की स्थिति होती है। इसको लेकर आगे और सतर्कता बरती जाएगी।
डॉ. एससी हेमबरन, एसीएमओ