केंद्र सरकार ने प्राइमरी से लेकर कक्षा आठ तक के मान्यता प्राप्त मदरसों में आधुनिक विषय पढ़ाने के लिए चार टीचर रखने का निर्देश दिया था। अब एक मदरसे के तीन टीचरों को ही मानदेय देने का आदेश आया है। इससे प्रदेश के करीब चार हजार टीचरों की सेवाएं समाप्त हो रही हैं।
प्रदेश में लगभग छह हजार मदरसों ने तहतानिया (कक्षा पांच तक) और फौकानिया (कक्षा आठ तक) की मान्यता ली है। इन मदरसों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, साइंस आदि विषय पढ़ाने के लिए चार टीचर रखने का नियम था। स्नातक योग्यता वाले टीचरों को छह हजार और परास्नातक योग्यता वाले टीचरों को बारह हजार रुपये महीने मानदेय दिया जाता है।
आल इंडिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया के प्रदेश महासचिव वहीदुल्ला सईदी ने बताया कि केंद्र की नई सरकार के अधिकारियों ने अब सिर्फ तीन टीचरों को मानदेय देने का आदेश दिया है। इससे पहले सन् 2008 में केंद्र सरकार ने शासनादेश जारी किया था। इस पर मुखालिफत की गई थी।
इस पर बाद में 27 जुलाई 2009 में शासनादेश जारी हुआ था कि जिन मदरसों में चार टीचर पढ़ा रहे हैं, उनको मानदेय मिलता रहेगा। अब नई सरकार ने फिर से व्यवस्था बदलने का फरमान सुना दिया है। सिर्फ तीन टीचरों को ही मानदेय देने का आदेश आया है।
इस लिहाज से प्रदेश के करीब चार हजार टीचरों की सेवाएं समाप्त हो रही हैं। आगे से इटावा, कानपुर समेत तमाम जिलों के सैकड़ों मदरसा टीचरों को मानदेय नहीं मिलेगा। सईदी ने कहा कि लखनऊ में एक प्रतिनिधिमंडल 28 मार्च को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद आजम खां से मिलकर अपनी बात रखेगा। इसके बाद केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मामले के मंत्री से मुलाकात की जाएगी।
टीचरों का मानदेय आया
इटावा। लोकसभा चुनाव से पहले लखनऊ में हुए मदरसा टीचरों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव ने एलान किया था कि मदरसा के स्नातक टीचरों को दो हजार और परास्नातक के टीचरों को तीन हजार राज्य सरकार मानदेय देगी। राज्य सरकार ने अपना 11 महीने का मानदेय भेज दिया है।
प्रभारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रजनीश पांडेय ने बताया कि जिले में 14 मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ा रहे 41 टीचरों का मानदेय आया है। राज्य सरकार ने 9.79 लाख और केंद्र सरकार ने 14.82 लाख रुपये भेजे हैं। अब टीचरों के खातों में पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। कानपुर के डीएमओ मुकेश चंदानी ने बताया कि 186 टीचरों के मानदेय का पैसा आया है।