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फाइलों में फंसे 500 हैंडपंप

Thu, 26 Mar 2015 11:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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गर्मी बस आ ही गई है। एक बार फिर जिले में पेयजल किल्लत के लिए तैयार रहिए। हैंडपंप की डिमांड वाली फाइल धूल खा रही है। जल निगम के हाथ खाली हैं। इतना भी पैसा नहीं है कि एक हैंडपंप भी लगा सके। दरअसल केंद्र सरकार ने यह कहते हुए नए हैंडपंपों के लिए पैसा देने से मना कर दिया कि इटावा में मानक से अधिक हैंडपंप है।
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राज्य सरकार उन्हीं को ठीक कराए। इसके बाद विभाग ने 500 हैंडपंप के लिए शासन से दो माह पूर्व 347.48 लाख रुपये मांगे थे। अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। तकरीबन सभी ब्लाक क्षेत्र में हैंडपंप की जरूरत है। जल निगम अष्टम शाखा में 500 प्रार्थनापत्र पड़े हैं। विभाग इस स्थिति में भी नहीं है कि वह फरियादियों को आश्वस्त कर सके कि उनकी मांग आगे चलकर पूरी कर दी जाएगी।

केंद्र सरकार ने पैसा देना किया बंद
नए हैंडपंप के लिए अभी तक केंद्र सरकार से धनराशि मिलती रही है, लेकिन इधर भारत सरकार ने नए हैंडपंपों के लिए पैसा नहीं भेजा। जल निगम एक्सईएन गंगा सिंह के मुताबिक जिले में मानक से अधिक हैंडपंप लगे हैं। आबादी और स्थापित हैंडपंपों की भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने नए हैंडपंप के लिए धनराशि नहीं दी।
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अब राज्य सरकार से डिमांड के अनुरूप धनराशि मिलती है तो जनप्रतिनिधियों की संस्तुति पर नए हैंडपंप लगाए जाएंगे। इससे पहले प्राप्त प्रार्थनापत्रों की स्थलीय जांच करवाई जाएगी। उनमें किसी की मांग उचित होगी तो पीडब्ल्यूडी मंत्री को अवगत कराते हुए हैंडपंप लगवाया जाएगा।

बिना मानक हैंडपंपों से है समस्या
जिले में करीब 29,600 हैंडपंप लगे हैं। इनमें हजारों हैंडपंप मात्र शोपीस बने हैं। हैंडपंपों को लगाने में भाई भतीजावाद हमेशा प्रभावी रहा है। जरूरत की बजाय सिफारिश का बोलबाला रहा है। कहीं-कहीं एक साथ 5-5 हैंडपंप लगा दिए गए हैं तो कहीं दूर तक हैंडपंप नजर नहीं आते।

यहीं वजह है कि आबादी और स्थापित हैंडपंप के लिहाज से मानक पूरा हो चुका है, लेकिन कई क्षेत्रों में पीने के पानी की किल्लत है। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में 27,500 और नगरीय निकाय क्षेत्र में 2100 हैंडपंप लगे हैं। विभाग की मानें तो इनमें करीब 1600 हैंडपंप रिबोर योग्य हैं।

जिम्मेदारी से बचना है मकसद
खराब हैंडपंपों को दुरुस्त करने का नियम है कि सामान्य गड़बड़ी होने पर ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत और शहरी क्षेत्र में नगर पालिका के अधीन कार्यरत जलकल विंग ठीक कराएगी, लेकिन यह सरकारी संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी से बचती दिखती हैं।

जल निगम के एक्सईएन गंगा सिंह बताते हैं कि उनके पास सभी छह निकाय क्षेत्रों से 378 खराब हैंडपंपों की सूची आई। जब इन हैंडपंपाें की जांच कराई तो सिर्फ 122 हैंडपंप ही रिबोर योग्य पाए गए। जाहिर है कि 256 खराब हैंडपंपों की सिर्फ सामान्य मरम्मत होनी है, लेकिन उसे रिबोर में दिखा दिया गया।

1350 रिबोर हैंडपंपों के भेजे गए प्रस्ताव
जल निगम ने जिले के तीनों विधायकों से प्राप्त 1340 रिबोर हैंडपंपों के प्रस्ताव शासन को भेजे हैं। इनमें जसवंतनगर विधायक/ पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल सिंह यादव के 355.48 लाख रुपये के 540 हैंडपंप, भरथना विधायक सुखदेवी वर्मा के 408.71 लाख रुपये के 600 एवं सदर विधायक रघुराज सिंह शाक्य के 138.48 लाख रुपये के 200 रिबोर हैंडपंप के प्रस्ताव शामिल हैं। एक्सईएन गंगासिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के रिबोर योग्य हैंडपंपाें के लिए भेजे गए इन प्रस्तावों को शासन से अभी मंजूरी नहीं मिली है।
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