आखिरकार ईश्वर को किसानों पर रहम आ ही गया। मंगलवार को आसमान से फलसों के लिए अमृत बरसा। इस बारिश से किसानों के चेहरे चमक उठे। किसानों की मानें तो इस बारिश से गेहूं, आलू, चना, जौ आदि फसलों को लाभ मिलेगा।
इसके साथ ही देरी से बोई गई सरसों की फसल को भी लाभ होगा हालांकि जिन किसानों की सरसों की फसल में फूल आ गया होगा उन किसानों को इस बारिश से थोड़ा बहुत नुकसान होगा।
वहीं इस बारिश से बढ़ी सर्दी से व्यापारियों के चेहरों पर रौनक आ गई है। व्यापारी मान रहे हैं कि सर्दी और गलन बढने से गर्म कपड़ों और सर्दी से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बिक्री शुरू हो जाएगी।
आधा पौष माह गुजर जाने के बाद भी तापमान में गिरावट न आने से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरे साफ दिखने लगी थीं। किसानों को कुछ राहत तब हुई जब मकर संक्रांति के साथ ही तापमान का गिरना शुरू हुआ।
तभी बदले मौसम का असर मंगलवार को बारिश के रूप में देखने को मिला। मंगलवार की सुबह शुरू रिमझिम बारिश दोपहर 12 तक जारी रही। उसके बाद दोपहर दो बजे फिर बारिश हुई और लगभग दो घंटे तक बारिश हुई।
मनियांमऊ निवासी गिरीशचंद्र पाल, अरविंद आदि ने बताया कि पिछले दिनों तापमान में गिरावट न होने से फसलों को लेकर चिंता काफी बढ़ गई थी। आज जब पानी बरसा है तो अब उम्मीद बढ़ गई है कि अब फसलों की पैदावार में सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि इस बारिश से गेहूं, आलू, चना की फसलों को लाभ होगा।
यही बात कुशगवां बादशाहपुर निवासी गिरीश दुबे, गणेश राठौर ने भी कही। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अतहर हुसैन वारसी ने बताया कि बारिश से किसी भी फसल को नुकसान नहीं है। सभी फसलों के लिए बारिश का पानी अमृत के समान है। बारिश होने से तापमान में कमी आएगी। इससे पैदावार भी बढ़ेगी।
इटावा। सर्दी के साथ मंगलवार भोर से शुरू हुई बारिश से किसानों के बाद अगर किसी को सबसे अधिक फायदा है तो वह व्यापारियों को है। एक हफ्ते पहले तक सर्दी न के बराबर पड़ने से गर्म कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बिक्री पूरी तरह से ठप पड़ी थी।
जिससे व्यापारियों को करोड़ों रूपये का नुकसान होने स्थिति आ गई थी। व्यापार में इस लम्बे घाटे की आशंका से व्यापारियों का दिन का चैन और रातों की नींद उडी हुई थी। वहीं मंगलवार को हुई बारिश से व्यापारियों के चेहरे खिल गए। व्यापारियों का कहना है कि बिक्री के साथा बाजार में रौनक आ जाएगी।