आरक्षण बुकिंग विंडो में तैनात क्लर्क ने विभाग से मिलने वाले सेकेंड क्लास के पास पर अपने पति और मां के लिए फर्स्ट क्लास शताब्दी का टिकट जारी कर दिया।
यात्रा के दौरान टीटीई ने उन्हें पकड़ लिया और उनका पास जब्त करके उन्हें एफटी जारी कर दी। अब टीटीई इसकी रिपोर्ट विभाग को सौंपेगा। इसके बाद संबंधित क्लर्क पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटकना तय है।
रेलवे कर्मचारियों को उनके ओहदा और रैंक के हिसाब से पास मिलता है। इटावा स्टेशन पर तैनात रिजर्वेशन क्लर्क ने विभाग से जारी सेकेंड क्लास के पास पर अपने पति और मां के लिए 12033 कानपुर-नई दिल्ली शताब्दी में फर्स्ट क्लास कोटे में आरक्षण कर दिया।
मंगलवार को रेलकर्मी के परिजन इटावा से नई दिल्ली के लिए शताब्दी में सवार हो गए। ट्रेन में चल रहे टीटीई ने जब उनका आरक्षण चेक किया तो वह अवैध पाया गया। इस पर टीटीई ने उनका पास जब्त कर लिया और उन्हें एफटी (फ्री टिकट) जारी कर दिया। साथ ही पूरे मामले की जानकारी स्थानीय अधिकारियों को दी।
विभागीय सूत्रों की मानें तो क्लर्क को इसका खामियाजा कार्रवाई के रूप में उठाना पड़ सकता है क्योंकि टीटीई जब्त पास की रिपोर्ट सौंपेगा। इसके बाद पूरे मामले की विभागीय जांच होगी। जांच के बाद संबंधित क्लर्क पर कार्रवाई होना तय है। विभागीय क्लर्क के फर्जीबाड़े पर पर्दा डालने के लिए अफसर चुप्पी साधे रहे।
आरक्षण सुपरवाइजर एचपी शर्मा से बातचीत की गई तो उन्होंने जानकारी न होने की बात कहकर पूरा मामला टाल दिया। विभागीय सूत्रों की मानें तो सेकेंड क्लास के पास पर एसी-3 तक में यात्रा की जा सकती है। शताब्दी और राजधानी में तो सेकेंड क्लास के पास पर बिल्कुल भी यात्रा नहीं की जा सकती।