घटना की जानकारी देते मृतक के परिजन।
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कोतवाली पुलिस सजगता बरतती तो शायद अधेड़ मान सिंह की हत्या न होती। मृतक के भतीजे ने मारपीट की सूचना दी थी, लेकिन पुलिस ने सिर्फ प्लाट पर काम रुकवाकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। दबंगों के खिलाफ न तो कोई मामला दर्ज किया गया और न ही उन्हें पकड़ने में कोई रुचि दिखाई। अगर प्लाट के पास फोर्स ही तैनात होता तो शायद दबंग फायरिंग करने का दुस्साहस न करते।
गाड़ीपुरा मोहल्ले में प्लाट के विवाद में मानसिंह की जान चली गई। शुक्रवार सुबह जब राजकुमार प्लाट पर निर्माण कार्य करा रहा था तभी निशांत ने साथियों के साथ वहां आकर निर्माण कार्य रुकवा दिया और फायरिंग की। पीड़ित ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी लेकिन वह नहीं पहुंची। बाद में पीड़ित एसएसपी से मिले। प्रभारी कोतवाल ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्य रुकवा दिया और दोनों पक्षों से कहा कि तहसीलदार व राजस्व विभाग में जाकर निस्तारण कराएं। अगर दबंगों पर कार्रवाई हुई होती तो मानसिंह बच सकता था।
मारपीट का लगाया आरोप
इटावा। पीड़ित राजकुमार ने दबंगों पर कोतवाली में भी मारपीट करने का आरोप लगाया। राजकुमार ने बताया कि रात को जब उसके चाचा मान सिंह क ो गोली मार दी गई तो वह कोतवाली में रिपोर्ट लिखाने पहुंचे। वहां दूसरे पक्ष के लोग भी आ गए और उनके साथ मारपीट की। इस संबंध में प्रभारी कोतवाल योगेंद्र शर्मा ने बताया कि जिस समय ये लोग पहुंचे उस समय कोतवाली में कोई मौजूद नहीं था। फोर्स गश्त पर चला गया था। दोनों पक्ष कोतवाली पहुंचे। हो सकता है, कहासुनी हुई हो।