सैफई के रिम्स आडिटोरियम में सारस एवं वेटलैंड्स के संरक्षण के लिए हुए दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सारस संगोष्ठी में देश-विदेश के विशेषज्ञों की मौजूदगी में विचार मंथन के बाद यूपी को सारस एवं वेटलैंड संरक्षण का ग्लोबल लीडर चुन लिया गया है।
इसके साथ ही संगोष्ठी में वन विभाग ने जिला व पंचायत स्तर पर सारस व वेटलैंड संरक्षण के लिए कार्ययोजना बनाकर अगले वर्ष लागू किए जाने की घोषणा की। दो दिवसीय संगोष्ठी के समापन से पहले पैनल डिस्कसन में यह प्रस्ताव पास हुआ।
इसके साथ ही विशेषज्ञों ने सारस बेल्ट बनाकर सारसों की मौत का कारण बन रही रासायनिक खाद को प्रतिबंधित किए जाने व वेटलैंड पर लगातार हो रहे कब्जे को रोकने के लिए सरकारों को कड़े कानून बनाने का भी प्रस्ताव तैयार हुआ, जो प्रदेश सरकार व विभिन्न देश व प्रदेशों की सरकारों के समक्ष रखा जाएगा।
देश विदेश के विशेषज्ञों ने उक्त प्रस्ताव तैयार कर उस पर अपनी स्वीकृति दे दी। अब यह प्रस्ताव यूपी सरकार के सामने रखा जाएगा साथ ही विभिन्न देश व प्रदेशों की सरकार से भी प्रस्ताव पर कार्ययोजना बनाने के लिए सहयोग मांगा जाएगा।
संगोष्ठी में जुटे 9 देशों के विशेषज्ञों ने माना है कि उनके देशों में इस तरह की संगोष्ठी संभव नहीं जिसमें सिर्फ एक विभाग नहीं बल्कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल होकर सारस और वेटलैंड पर चिंतन करें। ऐसे में सभी ने उत्तर प्रदेश को सारस एवं वेटलैंड संरक्षण के लिए ग्लोबल लीडर बनाने पर सहमति जताते हुए प्रस्ताव को पास कर दिया।
विश्व स्तरीय कमान हाथ में आने के बाद वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव रूपक डे ने अगले ही वर्ष से यूपी में सारस एवं वेटलैंड संरक्षण पर कार्ययोजना बनाकर इसे जिला व पंचायत स्तर पर लागू किए जाने की घोषणा की।
इसके साथ ही संगोष्ठी में सारस संरक्षित क्षेत्रों में रासायनिक खाद के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध, वेटलैण्ड पर निरंतर हो रहे कब्जों को रोकने के प्रयास, क्षेत्रीय आम नागरिकों की टीम बनाकर सारस एवं वेटलैण्ड संरक्षण का कार्य शुरू करने, सारस की गणना का कार्य शुरू किए जाने, सारस के अंडों को संरक्षित करने आदि के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई गई।
वहीं अंतराष्ट्रीय क्रेन फाउन्डेशन यूएसए के साथ हुए समझौते के तहत भारत में क्या क्या होगा इसको भी सावर्जनिक किया गया। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है कि अगले 10 वर्षों तक भारत अमेरिका के साथ मिलकर सारस एवं वेटलैण्ड संरक्षण का कार्य करेगा। वहीं संगोष्ठी में शामिल टाटा ग्रुप के डा समीर सिन्हा ने भी देश के साथ विदेशों में भी सारस संरक्षण पर टाटा ग्रुप के द्वारा पूरा सहयोग दिए जाने की घोषणा की।