शहर कोतवाली क्षेत्र के सती मोहल्ले में हुई युवक की गला रेतकर हत्या के मामले में खेल कर रही पुलिस शनिवार को बैकफुट पर आ गई।
अमर उजाला में प्रमुखता से खबर छपने के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर शनिवार को गैर इरादतन हत्या के केस को हत्या की धारा-302 में तरमीम किया गया। अफसरों का कहना है कि थाने के मुंशी की गलती से युवक की मौत के बाद ऐसा हुआ।
हलांकि अफसरों ने इस खेल को भंापते हुए केस की विवेचना दरोगा नीरज शर्मा से इंस्पेक्टर क्राइम हामिद सिद्दकी को सौंप दी है। कोतवाली क्षेत्र के सती मोहल्ला में 2 जून की रात घर के अंदर 20 साल के दीपक की मूसल से सिर कूचने के बाद धारदार हथियार से गर्दन रेतकर हत्या की गई थी।
वारदात के कुछ देर बाद दीपक की बहन शशि ने कोतवाली पहुंचकर भाई की हत्या करने का गुनाह कुबूल किया था। आरोप लगाया था कि बुरी नीयत रखने की वजह से उसने भाई को मारा है। पुलिस ने घायल अवस्था में दीपक को अस्पताल पहुंचाकर पहले हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया।
उसकी मौत के बाद 3 जून को हत्या की बजाय गैर इरादतन हत्या की धारा-304 में केस को तरमीम कर दिया। जांच कर रहे पुलिस कर्मियों ने आशंका जताई कि दीपक की हत्या में शशि के साथ कोई और भी शामिल है। बावजूद इसके गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।
अमर उजाला ने पुलिस के इस खेल को उजागर करते हुए खबर प्रकाशित की तो अफसर हरकत में आए। शनिवार को एसएसपी आकाश तोमर की फटकार पर पुलिस ने हत्या की धारा-302 में केस को तरमीम किया।
पुलिस हत्या में बहन शशि के अलावा अन्य किसी के शामिल होने का अंदेशा जता रही है। शशि के मोबाइल को सर्विलांस पर लगाने के साथ ही पुलिस कुछ महीने पूर्व की कॉल डिटेल का भी पता लगाने में जुटी है।
पता लगाया जा रहा है कि घटना वाले दिन शशि की किससे बातचीत हुई थी। पुलिस यह भी पता कर रही है कि शशि की फोन पर किससे ज्यादा बातचीत होती थी।
हत्या का यह मुकदमा धारा 307 से 302 में तरमीम किया गया है। हत्यारोपी युवती ने भाई पर जो आरोप लगाया है उसकी भी जांच की जा रही है। यदि विवेचना में आरोप साबित हुआ तो धारा 302 प्रभावी नहीं होगी। आकाश तोमर, एसपी इटावा