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Etawah News: परिवार को मृतक आश्रित का लाभ न देने पर आयोग नाराज

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इटावा। उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने नगर पालिका परिषद इटावा में कर्मचारी की आत्महत्या के मामले में उसके परिजनों को अभी तक आश्रित लाभ न दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की है। आयोग ने मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। इसमें नगर पालिका परिषद को स्थायी या अस्थायी रूप से सुपरसीड (नगर पालिका परिषद की शक्तियों को छीनकर उसे भंग कर देना) करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में डालने के निर्देश दिए हैं।
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यह मामला नगर पालिका परिषद के वरिष्ठ क्लर्क दिवंगत राजीव कुमार यादव से जुड़ा है। उनकी पत्नी नीतू यादव ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि पति को वरिष्ठता के बावजूद पदोन्नति नहीं मिली। उच्च न्यायालय के आदेश और अवमानना नोटिस के बाद भी अध्यक्ष ने उन्हें प्रताड़ित किया। इस उत्पीड़न से तंग आकर राजीव यादव ने 26 सितंबर 2025 को आत्महत्या कर ली थी। आयोग ने सुनवाई में पाया कि मृतक स्थायी कर्मचारी थे। उनके विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई लंबित नहीं थी। फिर भी अध्यक्ष ने उनके सेवा लाभ, पेंशन और आश्रित बेटे की नियुक्ति रोकी। आयोग ने इसे विधि विरुद्ध और अनैतिक कृत्य बताया है।







आयोग ने 24 मार्च 2026 को सभी देयकों के भुगतान का आदेश दिया था। साथ ही मृतक आश्रित की नियुक्ति का भी निर्देश दिया गया था। अनुपालन न होने पर 07 अप्रैल 2026 को जिलाधिकारी इटावा को निकाय सुपरसीड करने को कहा गया। अब 21 अप्रैल 2026 को मुख्य सचिव को अंतिम आदेश भेजा गया है। इसमें मुख्यमंत्री के समक्ष सुपरसीड का प्रस्ताव रखने को कहा गया है। जिलाधिकारी के माध्यम से भुगतान कराने की अपेक्षा भी की गई है।
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आठ मई को होगी अगली सुनवाई



विवाद का मूल कारण नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा भुगतान और नियुक्ति से संबंधित पत्रावलियों पर हस्ताक्षर न करना है। आयोग ने कहा कि अध्यक्ष ने राज्य सरकार के नगर पालिका उद्देश्यों को बदनाम करने का प्रयास किया है। इस मामले की अगली सुनवाई आठ मई 2026 को निर्धारित की गई है। आयोग मानवाधिकारों के हनन को गंभीरता से ले रहा है।
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