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कंट्रोलर की रिपोर्ट पर टिका छात्रों का भविष्य

Fri, 10 Apr 2015 12:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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जनता कालेज बकेवर की एक गलती की वजह से बीएससी के दो दर्जन स्टूडेंट्स पर साल खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। कालेज प्रशासन ने इसका ठीकरा विश्वविद्यालय पर फोड़ दिया है। वह अपनी गलती मानने को तैयार नही है। स्टूडेंट्स का कहना है कि रिसीव करते वक्त यह क्यों नहीं देखा गया कि पेपर के पैकेट पर दिन-तारीख लिखी है कि नहीं। उधर कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति ने कंट्रोलर को जांच के निर्देश दिए हैं। अब स्टूडेंट्स का भविष्य उनकी जांच रिपोर्ट पर टिका है।
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जनता कालेज में बीएससी तृतीय वर्ष में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स का बायोटेक विषय का पेपर 22 मार्च को होना था। वे पेपर देने पहुंचे, लेकिन कालेज ने पेपर न होने की बात कहकर वापस कर दिया। बताया गया कि अब पेपर 29 मार्च को होगा। स्टूडेंट्स 29 मार्च को पहुंचे तो उन्हें परीक्षा न होने की बात कहते हुए टरका दिया गया। तब से आज तक उक्त पेपर नहीं हुआ। बाद में पता चला कि उक्त पेपर 22 मार्च को ही होना था। कालेज प्रशासन की गलती से पेपर नहीं हुआ। बुधवार को कुछ छात्राओं ने इसकी शिकायत डीएम से की।

उधर, कालेज प्रशासन इसका ठीकरा विश्वविद्यालय पर फोड़ रहा है। उसका कहना है कि बायोटेक के पेपरों के बंडल पर दिन और तारीख नहीं लिखी थी। ऐसे में बंडल नहीं खोला गया, जिससे यह समस्या खड़ी हुई। जबकि स्टूडेंट्स का कहना है कि कालेज की ओर से जिसने भी पेपर रिसीव किए उसने यह नहीं देखा कि बंडल पर डेट और डे अंकित है कि नहीं।
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रिसीव करते उक्त डेट और डे देख लिया जाता तो स्टूडेंट्स का भविष्य दांव पर न लगता। परीक्षा के एक दिन पहले भी पेपर के बंडल को चेक करना चाहिए। जिस दिन उन्हें परीक्षा नहीं है कहकर वापस किया गया था तब भी इसकी जांच कर सकते थे।

बता दें कि पेपर छूटने से क्लास की 21 छात्राओं के साथ तीन छात्रों का भविष्य अधर में है। कालेज प्रशासन की ओर से स्टूडेंट्स को बैक पेपर देने की सलाह दे जा रही है। उधर कुलपति ने विश्वविद्यालय के कंट्रोलर को जांच के निर्देश दिए हैं। कंट्रोलर की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट होगा कि लापरवाही कहां हुई।

प्राचार्य डॉ. आरआर अग्रवाल ने बताया कि 30 मार्च को कालेज के क्लर्क पवन कुमार को विश्वविद्यालय भेजा था। एक अप्रैल को मै खुद, प्राध्यापक डॉ. एके पांडेय के साथ कुलपति से मिलने गया था। गलती विश्वविद्यालय स्तर पर हुई है, क्योंकि भेजे गए पेपर बंडल पर तारीख और समय अंकित नहीं था। कुलपति ने इस संबंध में कंट्रोलर से रिपोर्ट मांगी है। फिलहाल परीक्षा की कोई नई तारीख तय नहीं हुई है।
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