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तकनीकी मंजूरी के बिना कराए मनरेगा के 455 काम

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इटावा। बिना तकनीकी स्वीकृति के मनरेगा के 455 विकास कार्यों पर एक करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। शासन स्तर पर मामला पकड़ में आने पर जांच शुरू कराई गई है। मंडल स्तर पर गठित तकनीकी सलाहकार समिति टीएसी सभी कार्यों की जांच करेगी। गड़बड़ी की शिकायतों के आधार पर होने वाली इस जांच को लेकर हड़कंप है। तकनीकी समिति दो मार्च को जिले में शिकायतों की जांच करेगी।
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मनरेगा में प्रस्तावित काम की तकनीकी सहायक अथवा अवर अभियंता मौके पर जाकर तकनीकी रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसके बाद उनका प्रस्ताव तैयार कर मनरेेगा के साफ्टवेयर सिक्योर पर अपलोड करते हैं। चार लाख रुपये तक के काम ब्लाक स्तर पर और इससे अधिक के काम आरईएस अथवा जिला पंचायत के अभियंता के अनुुमोदन के बाद स्वीकृत किए जाते हैं। इस प्रक्रिया से गुजरे बिना होने वाले कामों पर अंगुली उठ सकती है। यही गलती इटावा में भी पकड़ी गई है। विभाग को इस आशय की शिकायत की गई है कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कुल मिलाकर 455 काम ऐसे हैं जिनका इस्टीमेट निर्धारित कंप्यूटर सॉफ्टवेयर पर नहीं बनाया गया है।
शासन स्तर पर ऐसी शिकायतें मिली तो सभी कार्यों की जांच कराने का निर्णय लिया गया। मंडल स्तर से इसके लिए टीएसी का गठन कर दिया गया है। यह यह समिति शिकायतों की जांच कर शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। मनरेगा से जिले की सभी 471 ग्राम पंचायतों में काम कराए गए हैं। इसके साथ ही क्षेत्र पंचायतों के माध्यम से भी कामकाज कराए गए लेकिन निर्धारित सॉफ्टवेयर पर इस्टीमेट नहीं बनाने के मामले में शासन काफी गंभीर है। उपायुक्त मनरेगा शौकत अली ने बताया कि 455 विकास कार्यों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है। अब टीएसी जिले में आकर इसकी जांच करेगी।
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