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स्वतंत्रता सेनानी के परिजनों को खानी पड़ रही हैं ठोकरें

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अपनी व्यथा सुनातीं पार्वती देवी - फोटो : ETAWHA
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इटावा। स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले सेनानी का परिवार मिट्टी के मकान में जीवन यापन करने को मजबूर है। घर तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता भी नहीं बन सका। दर-दर की ठोकरें खाने के बाद जब सरकार से मदद की उम्मीद जगी तो जांच का हवाला देकर फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
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बढ़पुरा ब्लाक की ग्राम पंचायत नगला बीरबल में 1947 की लड़ाई में शामिल रहे स्व. होरीलाल शर्मा का परिवार दर-दर की ठोकरें खा रहा है। परिजनों के पास खाने और रहने की भी व्यवस्था नहीं है। होरीलाल की पत्नी पार्वती देवी ने बताया कि 1946 में जब देश में आजादी की लड़ाई चल रही थी तब उनके पति स्व. होरीलाल आर्मी की तरफ से भारत की लड़ाई में शामिल थे। 1982 में बेटी रमा की शादी करने के बाद 2001 में उनका निधन हो गया। सरकार से उन्हें पेंशन 250 रुपये मिलती थी जो बढ़कर 6000 रुपये हो गई है। पार्वती देवी का कहना है कि पति का पैतृक मकान मिट्टी का बना था, उसी में वे छोटे बेटा दिनेश के साथ रहती थीं। बड़ा बेटा बादशाह शर्मा गांव में ही अलग रहता है। गांव में घर तक जाने का कोई पक्का रास्ता नहीं है। बरसात में उनके मिट्टी के मकान का कमरा भी टूट गया। जब उन्होंने जिला सैनिक कल्याण बोर्ड में अपील की तो कॉलोनी की मंजूरी दे दी गई। जब फाइल बढ़पुरा ब्लॉक में पहुंची तो सेक्रेटरी ने जांच की बात कहकर टाल दिया। अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सेक्रेटरी मृदुल कुमार ने बताया कि समय मिलने पर जांच कर ली जाएगी।
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