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मुख्यमंत्री जी! जरा इधर भी देख लीजिए

Thu, 25 Jun 2015 11:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी वीआईपी जिले का जिला अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। विशेषज्ञ डाक्टर न होने से रोजाना 20 से अधिक मरीज पीजीआई सैफई के लिए रेफर किए जा रहे हैं।
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यदि जिला अस्पताल को डाक्टर मिल जाएं तो पीजीआई पर लोड तो कम हो ही सकता है साथ ही मरीजों क ो 20 कि मी दूर भटकने से निजात मिल सकती है।  

ओपीडी में रोजाना औसतन दो सौ से ज्यादा मरीज आते हैं। इनमें काफी बच्चे भी होते हैं। यदि यहां चार डाक्टर भी बैठे मिल जाएं तो खुद को खुशकिस्मत समझिए। सामान्य जुकाम या बुखार का तो इलाज मिल जाता है लेकिन कोई गंभीर बीमारी है तो निजी नर्सिंगहोम की शरण में जाना होता है या फिर पीजीआई।

पीजीआई में भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि सामान्य मरीज को तो पर्चा बनवाने में ही दो से चार घंटे का समय लग जाता है। जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक्स के छह पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में सभी खाली पड़े हुए हैं। डा. नरेंद्र सिंह का तबादला होने और वीएस अग्निहोत्री के सेवानिवृत्त होने से बच्चों की सेहत पूर्र्ण रूप से भगवान भरोसे है।
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यहां तक एनआरसी में भी डाक्टर नहीं हैं। कार्डियोलाजिस्ट के दो पद स्वीकृत हैं और दोनो करीब ढाई साल से रिक्त हैं। सप्ताह में चार दिन सैफई से कुछ फिजीशियन आते हैं और एक बजे के बाद निकल जाते हैं।

दो दिन तक हार्ट पेशेंट भगवान भरोसे रहते हैं। इस दौरान किसी को अटैक आ जाए तो पीजीआई से पहले प्राथमिक चिकित्सा भी नसीब होना मुश्किल है। लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए आईसीयू तथा उपकरण सालों से धूल खा रहे हैं। जबकि 30-35 मरीज रोज उपचार कराने के लिए अस्पताल आ रहे है।

सबसे अधिक परेशानी फिजीशियन को लेकर है। फिजीशियन के दो पद स्वीकृत हैं। और दोनाें ही दो साल से रिक्त पड़े हैं। फिजीशियन न होने से मरीज भर्ती होने से कतराते है।

संपन्न परिवार के  मरीज तो नर्सिंग होम में चले जाते है लेकिन मजबूरी में गरीब तबके  के मरीज कई दिनों तक पड़े रहते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के 34 स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र 16 डाक्टर हैं।

लाइव
समय: 11:40 सुबह
चेंबर नं. 21 में डा. महेंद्र कुमार मौजूद नहीं थे जबकि बाहर बड़ी संख्या मेें मरीज बैठे हुए थे। कई मरीजों को एंटीरेबीज इंजेक्शन लगने थे। बताया गया कि  डाक्टर साहब शासकीय कार्य से निकले हुए हैं।

समय: 11:44 सुबह
चेंबर नं. 120 में चेस्ट फिजीशियन डा. बीके मिश्रा मौजूद नहीं थे जबकि बाहर बड़ी संख्या में मरीज खड़े इंतजार कर रहे थे। मौके पर मौजूद अधीनस्थ डाक्टर साहब की लोकेशन के बारे में कुछ भी नहीं बता पाएं।

समय:11:48 सुबह
चेंबर नं.121 में  नाक, कान, गला विशेषज्ञ डा. जेपी चौधरी मौजूद नहीं थे। बाहर मरीजों की भीड़ लगी र्हुई थी। बताया गया कि डाक्टर अभी-अभी निकल गए हैं।

सुबह: 11:52 सुबह
चेंबर नं.118 में दंत रोग विशेषज्ञ डा. अतुल कुलकर्णी भी नहीं थे। बाहर कई मरीज खड़े हुए थे लेकिन कोई यह बताने वाला भी नहीं था कि डाक्टर क हां गए है और कितनी देर में लौटेंगे।

सीएचसी- पीएचसी भी भगवान भरोसे
जब जिला अस्पताल ही बदहाली से जूझ रहा हो तो सीएचसी तथा पीएचसी की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। 125 डाक्टरों के सापेक्ष मात्र 65 डाक्टर ही पदस्थ हैं। अधीक्षक सीएचसी के सभी आठ पद रिक्त है। जनरल सर्जन के आठ में से एक पद भरा हुआ है। प्रसूति रोग विशेषज्ञ के सभी आठ पद खाली हैं।

एनेस्थेटिस्ट, रेडियोलाजिस्ट, फिजीशिन  के भी आठ-आठ पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सभी खाली पड़े हैं। बालरोग विशेषज्ञ के भी दोनों पद रिक्त हैं। चिकित्साधिकारी लेबिल-2 के 18 में से 11, लेबल-1 के 37 में से 17 पद खाली हैं।

नजरें इनायत हो जाए तो हो जाए बल्ले-बल्ले

सड़कों की बदहाली हो दूर
शहर की सड़कों की बदहाली से खास ओ आम जूझ रहा है। इधर पीडब्ल्यूडी ने बेशक लीपापोती करके गढ्डों को पाट दिया है। इससे धूल के गुबार उड़ना बंद हो जाएंगे। लेकिन शहरवासी चाहते हैं कि जिस तरह सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के समय में रबड़ कोटेड चौराहे बने थे और सभी प्रमुख सड़कें स्मूथ दिखती थी। अब तक ऐसे प्रयास नहीं हुए हैं।

उद्योग-धंधों की दरकार
शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर युवाओं को नौकरी मिली है लेकिन सीएम का जिला अभी भी उद्योग धंधों से अछूता है। रोजगार के अवसर तलाशते युवाओं के लिए शहर के आसपास एरिया में बड़े उद्योग स्थापित कराए जाएं। औद्योगिक क्षेत्र सरायएसर बीते दो दशकों से खाली पड़ा है। इस दिशा में भी कड़े कदम उठाए जाएं।

जल निकासी के हों प्रबंध
हर साल नगरपालिका नालों की सफाई कराती है। लेकिन बरसात में पोल खुल जाती है। खासकर लाइनपार एरिया और पूरब-पश्चिम के अधिकांश नवविकसित मोहल्लों व कालोनियों में रहने वाले लोग बारिश के दिनों में घरों में कैद होकर रह जाते हैं। ऐसे में जैसे पेयजल किल्लत को दूर करने को सवा अरब रुपये की योजना को मंजूरी दी गई। उसी तरह जल निकासी के लिए वृहद स्तर पर योजना बनाई जाए।

पर्यटन हब बने
लॉयन सफारी की स्थापना के साथ ही पूर्व महीनों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की मंशा परिलक्षित हुई थी। जिसमें बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए लॉयन सफारी के अलावा जिले में कई अन्य स्थानों को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने पर विचार हुआ था। इसके लिए आवागमन को सुगम बनाने पर भी माथापच्ची हुई थी। पर्यटन हब की दिशा में जमीनी पहल हो।

दौरे पर शहर का रूट रहेगा डायवर्ट
इटावा। मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव गुरुवार को शहर का दौरा करेंगे। इसके लिए शहर की सारी व्यवस्थाएं चौकस की गई हैं। मुख्यमंत्री का कोई तय कार्यक्रम नहीं है।

वह शहर में कहीं भी जा सकते हैं इसलिए पूरे शहर पर प्रशासन की नजर है। मुख्यमंत्री के आगमन के मद्देनजर रूट डायवर्ट भी किया गया है। शहर का रूट नौ बजे से डायवर्ट रहेगा। शहर से बाहर जाने वाले लोग बाईपास से सीधे निकल जाएं।

ग्वालियर से आने वाले भारी वाहन ट्रक बस व आटो लोडर सवारी गाड़ी यमुना पुल से मानिकपुर मोड़ बाईपास होते हुए निकलेंगे।
कचौरा चौराहा से ग्वालियर की तरफ  जाने वाले वाहन मानिकपुर मोड़ होते हुए ग्वालियर को जाएंगे।
सराय भूपत फाटक से ग्वालियर एवं इटावा शहर की तरफ आने वाले वाहन मानिक पुर मोड़ बाईपास होते हुए गंतव्य को निकलेंगे।
आईटीआई और भरथना चौराहा से भारी वाहनों का प्रवेश शहर की ओर वर्जित रहेगा।
शास्त्री चौराहा से नौरंगाबाद चौराहा, पक्का तालाब चौराहा से कोतवाली, नौरंगाबाद चौकी तिराहा से नौरंगाबाद चौराहा की ओर नहीं जाया जा सकेगा।
नौरंगाबाद चौराहा से तहसील और नया शहर तिराहा से साबितगंज तहसील का रास्ता भी अवरुद्ध रहेगा।  रामगंज चौराहा से गल्लामंडी और  महिंद्रा एजेंसी तिराहा से रामगंज का रास्ता भी रोका जाएगा। 
तकिया चौकी तिराहा से रामलीला रोड और महेरा चुंगी चौराहा से बस स्टैंड की तरफ जाने वाले ट्रकों का प्रवेश वर्जित रहेगा। भारी वाहन  एफ.सीआई गोदाम होते हुए अपने गंतव्य को जाएंगे।
गाड़ीपुरा चौराहा से तहसील/बल्देव चौराहा की तरफ  जाने वाले सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा तथा यह सभी वाहन रामलीला रोड से पक्कावाग होते हुए निकलेंगे।
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टीटी तिराहा से शहर कोतवाली की ओर जाने वाले सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा।

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