इटावा। कोटा बैराज से पानी छोडे़ जाने के बाद चंबल नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार शाम पांच बजे जलस्तर खतरे के निशान 119.80 मीटर से 8.28 मीटर ऊपर 128.08 पर रिकॉर्ड किया गया। 25 और गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। अब बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या 75 हो गई है।
चंबल और यमुना का जलस्तर बढ़ने से चकरनगर, महेवा एवं बढ़पुरा ब्लाक के कई गांव टापू बन गए हैं। बस्तियों के साथ गांव के रास्तों पर पानी भर गया है। सड़कों पर नाव चल रहीं हैं।
बढ़पुरा विकास खंड के गांव पछांयगांव की मड़ैया में 40, बसबारा में 19 एवं बढ़पुरा की मड़ैया में 10 मकान पानी से घिरे हुए हैं। पूरे जिले के करीब 75 गांव इस समय बाढ़ की चपेट में हैं। पिछले 24 घंटों में 25 गांवों को भी पानी ने चारों ओर से घेर लिया है। एसडीएम सदर सिद्धार्थ ने तीनों गांवों में जाकर लोगों तक खाने पीने की वस्तुएं पहुंचाईं। तसल्ली की बात यह है कि सोमवार तक चंबल जिस रफ्तार से बढ़ रही थी। उसमें अब काफी कमी आई है।
सोमवार को 9 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा पानी अब घटकर 4 सेमी प्रति घंटे रह गया है। चंबल जल आयोग के प्रभारी शहजादे खान ने बताया कि अगर कोटा बैराज से और पानी नहीं छोड़ा गया तो बुधवार तक जलस्तर स्थिर हो जाएगा। तीन दिन से लगातार बढ़ रहे चंबल नदी के जलस्तर ने आज भयंकर रूप धारण कर लिया है। बाढ़ ने 75 गांवों की फसलें भी नष्ट की हैं।
सबसे अधिक नुकसान ग्राम हरौली में हुआ है। इस गांव की सौ प्रतिशत खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं। घरों में रखा अनाज, भूसा भी खराब हुआ है।
मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी राजा गणपति आर पीएसी के मोटरबोट से तीन किलोमीटर की दूरी तय कर ग्राम हरौली पहुंचे। ग्रामीणों का हाल जाना। उन्होंने इसी रास्ते पर स्थित ग्राम नीमाडांडा में जाकर भी लोगों का हालचाल लिया यह गांव भी चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है। बिजलीघर के कमरे बाढ़ के पानी में डूब जाने से दो दिन से इस क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति सुरक्षा कारणों से बंद कर दी गई है।
क्षेत्र के ग्राम चकरपुरा, हरौली, भरेह, पथर्रा का नगला, निबी, कायची, नीमा डांडा, डिभौली, बकरा के संपर्क मार्ग पानी से डूब गए हैं। इस कारण इन गांवों के लोग नाव या खाली ड्रमों के सहारे पानी पार कर रहे हैं। चकरनगर-भरेह मार्ग पर मार्ग चंबल का पानी भर जाने से यह बंद हो गया है। फिर भी लोग जान जोखिम डालकर यहां से वाहन निकाल रहे हैं। इस क्षेत्र के मुख्य मार्ग बाबरपुर महुआ सूडान मार्ग पर दस फीट से भी अधिक गहराई तक पानी होने कारण यह मार्ग दो दिन से बंद है। बाढ़ से इस क्षेत्र के ग्राम वरेछा, जौनानी, कधेसीघार, नगला पिलुआ, मितरौल, चीकना, जगतौली, बचौली, ढकरा, ददरा, नंदा, मिटाहटी, बछेड़ी, कुन्दौल पालीवाल, छिवरौली, इमलिया, महुआ सूडा, पथर्रा, अचरौली, भरेह, हरोली, नीमा डांडा, कायची, निबी, कढाकास्दा, चकरपुरा, रावनी, वंसरी, कतरौली, विहार, पुराखेरा, कचहरी, करियावली, शेरगढ़, नीमरी,कालेश्वर की गढ़िया, बिड़ौरी, रीतौर, कधावली, बिठौली, गोपियां खार, मड़ैया रीतोर, ललूपुरा, चौरैला, तेलियनखोडन, खोड़न, रनिया, खिरीटी, गौहानी, डिभौली, नौगांव, पथर्रा की मड़ैया, सहित संत तय गांवों की बाजरा एवं तिल की फसल को भारी नुकसान हुआ है।
उपजिलाधिकारी चकरनगर ने बताया कि आज शाम तक चंबल नदी का जल स्थिर होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि बाढ़ से फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसका आकलन कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बाढ़ से निपटने के लिए सभी इंतजाम किए जा रहे हैं। अब तक कोई जनहानि नहीं हुई है। प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
चंबल का जलस्तर
चेतावनी बिंदु - 119.80
जलस्तर -128.08