इटावा। चैत्र नवरात्र में इस बार कोविड गाइड लाइन का पालन करने के बाद ही मंदिर में प्रवेश मिलेगा। मंदिर में एक साथ पांच से अधिक भक्त प्रवेश नहीं कर सकेंगे। मास्क लगाकर और सैनिटाइज होने के बाद ही पूजा अर्चना करने की अनुमति दी जाएगी। काली बांह मंदिर में आने वाले भक्तों को देवी मां के दूर से ही दर्शन कराए जाएंगे।
मंदिर के पुजारी सचिन मिश्रा ने बताया अभी इस संबंध में प्रशासन स्तर पर कोई दिशा निर्देश नहीं मिल सके हैं। बताया मंदिर का गर्भगृह चारों ओर से बैरिकेड कर रखा है। घंटों को कपड़े से बांध दिया जाएगा। मंदिर आने वाले किसी भक्त को अपनी ओर से नहीं रोक सकते। यह प्रशासन का काम है आगे जैसा निर्देश होगा उस पर अमल किया जाएगा। बताया कि काली बांह मंदिर में पहली आरती तड़के तीन बजे होती है। इसके बाद पांच बजे दूसरी और दोपहर दो बजे तीसरी और चौथी आरती रात नौ बजे होती है।
ब्राह्मणी देवी मंदिर पर नहीं लगेगा मेला
जसवंतनगर। बलरई क्षेत्र के बीहड़ों में विराजमान ब्राह्मणी देवी मंदिर परिसर में मेला नहीं लगेगा। गोल निशान भी बनेंगे ताकि लोग सोशल डिस्टेंस भी मेंटेन रखें। थानाध्यक्ष बलरई राजकुमार शर्मा ने बताया कि मास्क लगाकर ही देवी के दरबार में प्रवेश दिया जाएगा।
एक बार में पांच श्रद्धालु ही करेंगे दर्शन
बकेवर। कस्बा लखना स्थित मां कालका देवी के मंदिर परिसर की धुलाई कराई गई। मंदिर प्रशासन के ऋषभ शुक्ला ने बताया कि शासन के दिशा निर्देशों के तहत कोविड-19 का पालन कराया जाएगा। मंदिर में पांच-पांच लोगों को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। बिना मास्क के कोई भी मंदिर में प्रवेश नहीं करेगा।
घट स्थापना के दो मुहूर्त
भागवताचार्य रामजी पांडे ने बताया इस बार चैत्र नवरात्र में पूरे नौ व्रत मान्य रहेंगे। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल सुबह 5:28 मिनट से सुबह 10:14 मिनट तक रहेगा। घट स्थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 11 बज कर 56 मिनट से दोपहर 12: 47 मिनट तक रहेगा।
आने वाला समय मंगलकारी रहेगा
इटावा। प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. ब्रह्म कुमार मिश्र ने बताया कि इस बार अश्वनी नक्षत्र सर्वार्थ व अमृत सिद्धि योग में मां का आगमन हो रहा है जो शुभ सूचक है। चंद्रमा मेष राशि में और देर रात सूर्य भी मेष राशि में रहेगे। ऐसे में यह अद्भुत संयोग बन रहा है कि संवत के पहले दिन ही ग्रहों के राजा व रानी स्थित होंगे। इस बार नवरात्र में सर्वार्थ सिद्धि योग, रवियोग का संयोग बन रहा है जो सभी मंगल कामनाओं के लिए शुभ है। मां भगवती का आगमन अश्व पर व विदा नर वाहन पर हो रही है। जिससे विभिन्न प्रकार की आपदाओं से शांति मिलेगी। कलश पर लाल वस्त्र लपेटकर जौ बोकर, रोली, चावल, कपूर, नैवेद्य आदि से मां का पूजन करें। लौंग का जोड़ा व गूगल जरूर चढ़ाएं। आम के पत्तों से तोरण पताका बनाकर घर के मुख्य द्वार पर लगाएं। झंडा अवश्य चढ़ाएं।